दिल्ली ब्लास्ट: मुख्य आतंकी डॉ. उमर नबी के घर को सुरक्षा बलों ने उड़ाया

 दिल्ली में 10 नवंबर को हुए आतंकवादी विस्फोट मामले में सुरक्षा बलों ने गुरुवार देर रात जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के कोइल इलाके में मुख्य आतंकी डॉ. उमर नबी के घर को नियंत्रित IED विस्फोट के जरिए पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। यह कठोर कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत की गई है।

डीएनए से हुई उमर नबी की पुष्टि

सुरक्षा बलों ने यह कदम तब उठाया जब गुरुवार को DNA मैचिंग के बाद इस बात की 100% पुष्टि हो गई कि विस्फोटकों से भरी कार चला रहा व्यक्ति डॉ. उमर नबी ही था, जो विस्फोट में मारा गया। जाँच में लाल किले के पास कार में मिले शरीर के अंश उमर की माँ के DNA सैंपल से पूरी तरह मेल खा गए। आतंकी गतिविधियों में शामिल होने से पहले उमर नबी अपने क्षेत्र में एक अकादमिक रूप से कुशल पेशेवर के रूप में जाना जाता था। फिलहाल, पुलिस उसके माता-पिता और भाईयों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है ताकि उसके आतंकी नेटवर्क की और जानकारी जुटाई जा सके।

6 दिसंबर को देश में बड़े धमाकों की थी साजिश

जाँच एजेंसियों को अब तक की पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए 8 आतंकियों ने बताया है कि उनकी मुख्य साजिश 6 दिसंबर—यानी बाबरी मस्जिद ढहाने की बरसी—के दिन दिल्ली समेत देशभर में कई स्थानों पर सिलसिलेवार धमाके करने की थी।

खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, इस भयानक आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए उन्होंने कुल 32 पुरानी कारों का इंतजाम किया था। i20 कार जिसका इस्तेमाल लाल किले के पास विस्फोट में किया गया, वह इसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी। इको स्पोर्ट और ब्रेजा जैसी अन्य कारें भी इस योजना में शामिल थीं, जिनमें विस्फोटक भरकर विभिन्न ठिकानों पर धमाके करने की योजना थी।

 13 की मौत और फतेहपुर तगा के लोगों का फैसला

10 नवंबर को हुए विस्फोट में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।

इस बीच, जहाँ आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल शकील किराए पर रहता था, उस गांव फतेहपुर तगा के लोगों ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक फैसला लिया है। सरपंच प्रतिनिधि अरस मोहम्मद ने कहा कि डॉक्टर ने उनके गाँव को भी बदनाम कर दिया है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह फैसला किया है कि अब वे बाहरी लोगों को किराए पर मकान नहीं देंगे। उन्होंने यह भी तय किया है कि यदि भविष्य में मजबूरी में मकान किराए पर देना पड़ा, तो पहले सख्त पुलिस वेरिफिकेशन कराई जाएगी।

डॉक्टर मुजम्मिल ने खंडहरनुमा मकान मौलवी से ₹2500 मासिक किराए पर लिया था। घटना के बाद पुलिस और मीडिया की लगातार आवाजाही से ग्रामीण परेशान हैं।