छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासी टकराव: कांग्रेस ने अनियमितताओं का आरोप, भाजपा ने वादाखिलाफी गिनाई

छत्तीसगढ़ के रायपुर में समर्थन मूल्य पर धान की खरीद 15 नवंबर से शुरू हो गई है। कांग्रेस ने धान खरीद केंद्रों पर अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक राज्य स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई है। भाजपा ने कांग्रेस पर किसानों को बोनस न देने, भुगतान में देरी करने और वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है।

सरकार की नाकामी पहले ही दिन उजागर हो गई: शुक्ला

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, राज्य में शनिवार से धान खरीदी शुरू हुई लेकिन पहले दिन राज्य के 2748 केंद्रों में से 2560 केंद्रों में धान की खरीदी नहीं हुई। सरकार ने कोई तैयारी नहीं की है। सोसायटी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। किसानों को टोकन नहीं दिए जा रहे हैं।

प्रदेश के 15000 सोसायटी कर्मचारी हड़ताल पर हैं, सरकार हड़ताल समाप्त कराने पर ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि कर्मचारियों पर एस्मा लगाकर धमकाया जा रहा है। एक तो धान खरीदी की तिथि 15 दिन बाद शुरू होना और ऊपर से घोषित तिथि के बाद भी सभी केंद्रों पर खरीदी न होना सरकार की साजिश है।

कांग्रेस के वादों की विश्वसनीयता खत्म हो गई है: साव

कांग्रेस द्वारा निगरानी समिति के गठन को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “कांग्रेस क्या निगरानी करेगी? वही कांग्रेस जिसने किसानों को बोनस देने का वादा किया था और उसे कभी पूरा नहीं किया।”किसानों को धान का पैसा चार किश्तों में दिया गया। उनके वादे अब अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। साव ने बताया कि धान खरीदी के पहले ही दिन 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई और सभी खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।