जुलाई-सितंबर तिमाही में GDP 8.2% उछली, कांग्रेस ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के जीडीपी आंकड़े जारी किए। वैश्विक आर्थिक सुस्ती और अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित नए आयात शुल्क के दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है और 8.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि हासिल की है। एक साल पहले इसी तिमाही में वृद्धि दर केवल 5.6 प्रतिशत थी।

इन आंकड़ों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने खुशी जताई और इसे ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। वहीं कांग्रेस ने तुरंत सरकार पर तीखा प्रहार किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिस दिन तिमाही जीडीपी के शानदार आंकड़े आए, ठीक उसी दिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी नवीनतम डेटा क्वालिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क रिपोर्ट में भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली को दूसरा सबसे खराब ‘सी’ ग्रेड दिया है। उन्होंने दावा किया कि आंकड़े लगातार चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में कोई खास तेजी नहीं आई है और निजी क्षेत्र का निवेश अब भी सुस्त पड़ा है। बिना निजी निवेश के इस तरह की ऊंची वृद्धि दर लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती। श्री रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मुद्रास्फीति को कम दिखाकर नाममात्र जीडीपी वृद्धि को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।

इससे पहले वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि 8.2 प्रतिशत वृद्धि में निर्माण, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की मजबूत भागीदारी है। अब इन जीडीपी आंकड़ों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।