सिहोरा जिला आंदोलन: अब आर-पार की लड़ाई; कल भोपाल में CM मोहन यादव से मिलेंगे आंदोलनकारी

मध्य प्रदेश के सिहोरा को जिला बनाने की मांग पिछले दो दशकों से अधिक समय से सुलग रही है, लेकिन अब यह आंदोलन अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आंदोलनकारियों को 26 दिसंबर (शुक्रवार) को दोपहर 12 बजे भोपाल बुलाया है। यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले 19 दिनों से RSS के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू अन्न का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे हैं।

दो बार टूट चुका था मुलाकात का वादा

पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय तय हुआ है। इससे पहले:

  1. 16 दिसंबर: डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने मुलाकात का भरोसा दिया था, लेकिन उनके किसी करीबी के निधन के चलते बैठक टल गई।
  2. 23 दिसंबर: क्षेत्रीय विधायक संतोष बरकड़े ने मुलाकात की बात कही थी, लेकिन सीएम से समय न मिलने के कारण आंदोलनकारियों को खाली हाथ रहना पड़ा। विधायक द्वारा फोन बंद करने से आंदोलनकारी उग्र हो गए थे।

अनशन और संघर्ष की दास्तान

3 दिसंबर से शुरू हुए इस ‘आमरण सत्याग्रह’ में प्रमोद साहू की स्थिति गंभीर बनी हुई है। 9 दिसंबर को उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया था, लेकिन डिप्टी सीएम के आश्वासन पर जल ग्रहण किया। हालांकि, उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक सिहोरा जिला नहीं बन जाता, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। फिलहाल वे आईसीयू (ICU) से ही अपनी मांग पर अडिग हैं।

भोपाल कूच की तैयारी

मुलाकात का समय मिलने के बाद आज सैकड़ों आंदोलनकारी भोपाल के लिए रवाना हो रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई विधायक संतोष बरकड़े करेंगे। इसमें ‘लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति’ के सदस्यों के साथ पूर्व विधायक दिलीप दुबे, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश पांडे और कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे।

निर्णायक वार्ता की उम्मीद

  • तथ्यों के साथ पक्ष: आंदोलनकारियों का तर्क है कि भौगोलिक, प्रशासनिक और जनसंख्या के मानकों पर सिहोरा जिला बनने की पूरी पात्रता रखता है।
  • रणनीति: मुख्यमंत्री से वार्ता तय होने के बाद फिलहाल पुतला दहन और चक्काजाम जैसे उग्र प्रदर्शनों को स्थगित कर दिया गया है।
  • संकल्प: समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे भोपाल से ‘सिहोरा जिला’ की सौगात लेकर ही वापस आने का संकल्प लेकर जा रहे हैं।

पूरे सिहोरा क्षेत्र की निगाहें अब कल भोपाल में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। यदि वार्ता विफल रहती है, तो क्षेत्र में बड़े जन-आंदोलन की आशंका बनी हुई है।