20 साल बाद राज ठाकरे शिवसेना भवन पहुंचे, उद्धव के साथ जारी किया ‘शिवशक्ति वचननामा’

महाराष्ट्र की सियासत में एक यादगार दिन तब देखा गया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने लगभग दो दशकों बाद दादर स्थित शिवसेना भवन में प्रवेश किया। यहां शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता उद्धव ठाकरे के साथ वे एक ही मंच पर दिखे। दोनों चचेरे भाइयों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के मद्देनजर ‘शिवशक्ति वचननामा’ नाम से संयुक्त कार्यक्रम पत्र जारी किया।

शिवसेना भवन में कदम रखते ही राज ठाकरे ने पुरानी स्मृतियां याद कीं। उन्होंने कहा कि नया भवन पहली बार देख रहे हैं, लेकिन उनकी सभी यादें पुराने शिवसेना भवन से जुड़ी हुई हैं। भावुक लहजे में उन्होंने 1977 की एक घटना का जिक्र किया जब भवन निर्माण के समय पत्थरबाजी हुई थी। राज ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहां आकर ऐसा महसूस हो रहा है मानो लंबे समय बाद आजादी मिली हो।

सत्ताधारियों पर जोरदार प्रहार

प्रेस वार्ता के दौरान राज ठाकरे ने वर्तमान सत्ता पक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग महाराष्ट्र को उत्तर प्रदेश या बिहार जैसा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सत्ता हमेशा नहीं रहती, इसलिए अभी से सोचना चाहिए कि बाहर होने पर क्या होगा। उद्धव ठाकरे ने भी लोकतंत्र पर खतरे की बात कही और विधानसभा अध्यक्ष पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने मिलकर कहा कि मुंबई सहित महाराष्ट्र के सभी शहरों में मराठी भाषी और स्थानीय व्यक्ति ही महापौर बनेगा।

वचननामे में मुंबईवासियों के लिए प्रमुख संकल्प

शिवसेना (यूबीटी), मनसे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के संयुक्त वचननामे में स्थानीय नागरिकों और मराठी लोगों की भलाई पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्य वादों में शामिल हैं:

  • 700 वर्ग फुट तक के मकानों पर संपत्ति कर पूरी तरह माफ।
  • घरेलू कामकाजी महिलाओं और कोली समुदाय की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक मदद।
  • सस्ते आवास, बेहतर बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार।
    नगर निगम की स्कूलों की जमीन बिल्डरों को नहीं सौंपी जाएगी।
  • कक्षा 10 के बाद छात्रों के ड्रॉपआउट को रोकने के लिए स्कूलों में जूनियर कॉलेज शुरू करना।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

राज ठाकरे ने 2006 में शिवसेना से अलग होकर मनसे की नींव रखी थी। लंबे समय तक दोनों दलों में दूरी रही, लेकिन हालिया महीनों में मराठी पहचान और अन्य साझा मुद्दों पर निकटता बढ़ी। बीएमसी चुनावों के लिए यह एकता सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए मजबूत चुनौती पेश कर रही है।