राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की असिस्टेंट प्रोफेस अंत ने एम्स के भीतर व्याप्त ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर’ और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के दबाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
उस रात क्या हुआ था?
डॉ. रश्मि ने जब खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया, तो उनके पति (ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मनमोहन शाक्य) उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों के अनुसार, जब तक उन्हें एम्स पहुंचाया गया, उनका दिल धड़कना बंद कर चुका था। करीब 7 मिनट तक उनकी धड़कन रुकी रही, जिससे उनके दिमाग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गया और ‘ब्रेन डैमेज’ की स्थिति पैदा हो गई। इसी वजह से वे पिछले 24 दिनों से कोमा जैसी स्थिति में थीं।
डॉ. रश्मि की मौत के बाद एम्स प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लग रहे हैं:
- विभागाध्यक्ष पर सवाल: सोशल मीडिया पर एक नोटिस वायरल हुआ था, जिसमें डॉ. रश्मि को उनके विभागाध्यक्ष (HOD) द्वारा प्रताड़ित करने और ‘शो कॉज’ नोटिस के जरिए मानसिक दबाव बनाने की बात सामने आई थी।
- विभागीय बदलाव: विवाद बढ़ता देख एम्स प्रबंधन ने विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया था और एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई थी, लेकिन अब तक इसकी विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है।
जांच की मांग हुई तेज
डॉ. रश्मि वर्मा एम्स भोपाल में एक बेहद लोकप्रिय और मिलनसार डॉक्टर मानी जाती थीं। उनके निधन के बाद अब सोशल मीडिया और कैंपस में न्याय की मांग उठ रही है। डॉक्टर एसोसिएशन ने मांग की है कि प्रशासनिक दबाव और वर्क कल्चर की निष्पक्ष जांच हो ताकि भविष्य में किसी अन्य डॉक्टर को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।