2.3 लाख खाली पदों के बीच नाममात्र की नियुक्तियों के खिलाफ भावी शिक्षकों का हल्ला बोल; हनुमान चालीसा पढ़कर जताया कड़ा विरोध

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने एक विशाल ‘सत्याग्रह’ शुरू कर दिया है, जिसमें प्रदेशभर से आए करीब 2,000 भावी शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग का घेराव किया। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और भर्ती प्रक्रिया में पदों की बेहद कम संख्या को लेकर युवाओं में गहरा आक्रोश है। विरोध स्वरूप अभ्यर्थियों ने विभाग के सामने बैठकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सरकार से न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में तब्दील कर देंगे।

अभ्यर्थियों के गुस्से का मुख्य कारण सरकारी आंकड़ों और वर्तमान नियुक्तियों के बीच का भारी अंतर है। प्रदेश के राजपत्र के अनुसार, माध्यमिक शिक्षकों (वर्ग-2) के लगभग 99,197 और प्राथमिक शिक्षकों (वर्ग-3) के लगभग 1,31,152 पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार वर्तमान में केवल 10,800 और 13,089 पदों पर ही भर्तियां कर रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां होने के बावजूद इतनी कम नियुक्तियां करना न केवल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को भी विफल कर रहा है।

इसके अलावा, जनजातीय कार्य विभाग की प्रक्रिया में आरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि कई महत्वपूर्ण विषयों में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए एक भी पद विज्ञापित नहीं किया गया है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि वर्ग-2 के प्रत्येक विषय में कम से कम 3-3 हजार पद बढ़ाए जाएं और वर्ग-3 की कुल भर्ती को 25 हजार तक पहुँचाया जाए। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि जब तक यह वर्तमान भर्ती पद वृद्धि के साथ पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है।