राजधानी में जिंसी स्लाटर हाउस के मामले में नगर निगममे तेवर तीखे होते जा रहे हैं। इस मामले में निगम द्वारा भी जांच तेज की जा रही है और कटे मांस की रिपोरट देने वाले डाक्टर बेनीप्रसाद गौर और अन्यअधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है कि आखिर उन्होंने गलत रिपोर्ट क्यों दी। इस संबंध में निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि मामला जांच में है और इस संबंध में किसी भी अधिकारी को नहीं छोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि शहर में हिंदू संगठनों ने 17 दिसंबर को स्लॉटर हाउस से निकला ट्रक पकड़ा था। इसमें 26 टन मांस मिला था। यह 640 गायों के मांस के बराबर था। निगम का दावा है कि उस दिन स्लॉटर हाउस में सिफ 85 भैसे थी। डंक्टर ने भी इतनी ही भैंसों के काटे जाने की पुष्टि की थी। यही सीसीटीव कैमरों के फुटेज निगम ने पुलिस को सौंप दिए है सवाल है कि गायों का मांस ट्रक में कहां आया।इसके लिये ड्राइवर से भी पूछताछ की जाएगी
जिसी का स्लाटर हाउस बंद
गायों का मांस पकड़ाने के बाद निगम से जिसी के स्लाटर हाउस को सील कर दिया था जो अब तक नहीं खुला है। इसके लिये अब निगम की दूसरी टीम एक्टिवा है क्योंकि शहर में कुछ जगहों पर अवैध रूप से स्लोटिंग होने की शिकारातें मिलीं थी। इसके चलते निगम की टीम ने कसाईपुरा में खुली कुछ दुकानों से भी सैंपल लिये थे और उनसे पूछताछ की थी। निगम के अपर आयुक्त हर्षित तिवारी का कहना है कि जांच रिपोर्टको देखने के बाद भी कार्यवाही तय की जाएगी। अगर पशु चिकित्सक ने भैंसे लिखी हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।