ट्रंप बोले- भारत को टैरिफ देना ही होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ हालिया व्यापार समझौते को पूरी तरह बरकरार रखने की घोषणा की है, भले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया हो। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा और भारत को अमेरिकी सामानों पर टैरिफ देना जारी रखना होगा, जबकि अमेरिका की ओर से ऐसी कोई बाध्यता नहीं रहेगी।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि मोदी एक चतुर और प्रभावी नेता हैं, लेकिन पूर्व में भारत ने व्यापार में अमेरिका का अनुचित फायदा उठाया था। ट्रंप का दावा है कि नई डील से स्थिति पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में बदल गई है।

व्यापार के अलावा ट्रंप ने भू-राजनीतिक क्षेत्र में भी बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुरोध पर भारत ने रूस से तेल की खरीद काफी कम कर दी है, जिसे वे रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में अपनी कूटनीतिक सफलता मानते हैं। साथ ही, ट्रंप ने 2024-2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव को रोकने का श्रेय खुद को दिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि उनके हस्तक्षेप से करोड़ों लोगों की जान बचाई गई। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके कारण तुरंत शांति समझौता हो सका।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार से कई सवाल किए हैं। चिदंबरम का कहना है कि यदि टैरिफ असंवैधानिक घोषित हो गए हैं, तो अप्रैल 2025 से पहले की स्थिति बहाल होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने और रूसी तेल न खरीदने जैसे वादे किए, लेकिन बदले में भारत के आर्थिक हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हुई?

विपक्ष का आरोप है कि समझौते में अमेरिकी सामानों पर जीरो या कम टैरिफ की बात हुई, जबकि ट्रंप सार्वजनिक रूप से भारत पर टैरिफ थोपने की बात कर रहे हैं। इससे समझौता एकतरफा और भारत-विरोधी लग रहा है। फिलहाल वाशिंगटन में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल से समझौते की शर्तों और प्रभावों को स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।