मानसून की देरी से MP पर सूखे का साया: 44% कम बारिश दर्ज

दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रुख और देरी से मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी चिंता का विषय बन गई है। राज्य में जून के पहले 20 दिनों में औसत से 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 55 जिलों में से 45 जिले सामान्य स्तर से पीछे चल रहे हैं।

पूर्वी हिस्सों (जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग) में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां वर्षा में 60-65 प्रतिशत तक की कमी देखी जा रही है। पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों (इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, भोपाल आदि) में भी 25-30 प्रतिशत की कमी है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों सहित कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है।

भोपाल में इस बार अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति है, जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई, लेकिन अलीराजपुर जैसे कुछ जिलों में अब तक शून्य या नगण्य वर्षा दर्ज की गई है।

मानसून की देरी और संभावना

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून आमतौर पर मध्य प्रदेश में 15 जून के आसपास पहुंच जाता है, लेकिन इस बार यह 23-25 जून के आसपास प्रवेश कर सकता है। फिलहाल मानसून महाराष्ट्र-तेलंगाना क्षेत्र में रुका हुआ है और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल हो रही हैं।

आज और आने वाले दिनों का मौसम

मौसम विभाग ने 38 जिलों में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। सीहोर और आगर मालवा में तेज हवाओं (40-60 किमी/घंटा) का ऑरेंज अलर्ट है। प्री-मानसून गतिविधियों के तहत हल्की-मध्यम बारिश कुछ क्षेत्रों में जारी है, लेकिन पूर्ण राहत मानसून के सक्रिय होने के बाद ही मिलेगी।