भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर उत्पन्न तनाव के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को कड़े कदम उठाए। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव का टिकट न दिए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं के हिंसक प्रदर्शन के चलते भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। अब बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार की सभा, रैली या जुलूस की अनुमति नहीं होगी।
भाजपा ने 30 जुलाई को होने वाले दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले के तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया। शुक्रवार को हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। उन्होंने झांसी-ग्वालियर नेशनल हाईवे-44 को घंटों तक जाम कर दिया, जिससे आसपास के जिलों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और नारेबाजी हुई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पथराव भी किया, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में पुलिस अधीक्षक समेत कई जवान घायल हो गए। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
विरोध के तेज होते ही भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व से मिश्रा को टिकट देने की मांग करते हुए 24 घंटे का समय भी दिया था।
क्यों कटा टिकट?
नरोत्तम मिश्रा दतिया से कई बार विधायक रह चुके हैं और इस बार भी उन्होंने नामांकन पत्र खरीदा था। लेकिन पार्टी ने संगठनिक पृष्ठभूमि वाले आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। आशुतोष तिवारी ने पार्टी के इस फैसले का स्वागत किया है। सीट कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता के कारण खाली हुई है। उपचुनाव की मतगणना 3 अगस्त को होगी।
वर्तमान हालात
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरती है। नरोत्तम मिश्रा के समर्थक अब दिल्ली में उच्च नेतृत्व से बातचीत करने की तैयारी में हैं। पूरे मामले पर सियासी हलचल तेज है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।