अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम समझौते को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जबकि अमेरिका ने ईरान के अंदरूनी लक्ष्यों पर हवाई हमले कर अपनी ताकत दिखाई।
क्या हुआ?
अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 80 सैन्य स्थानों पर सटीक हमले किए। ये हमले मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में किए गए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की नौवहन को बाधित करने वाली क्षमता को कमजोर करना था।
ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसने बहरीन, कुवैत, कतर समेत पड़ोसी देशों में अमेरिका से जुड़े सैन्य अड्डों और सुविधाओं को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइलें और हमलावर ड्रोन इस्तेमाल किए गए। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय के आसपास अलर्ट बजाए गए, जबकि कुवैत और कतर में भी रक्षा प्रणालियां सक्रिय हुईं। कुछ जगहों पर मलबा गिरने से हल्की चोटें भी रिपोर्ट हुई हैं।
ईरानी सेना ने इन हमलों को अमेरिकी आक्रामकता का उचित जवाब बताया। हालांकि, यह कार्रवाई पूरे पांच देशों तक सीमित नहीं थी, बल्कि मुख्य रूप से खाड़ी सहयोगी देशों पर केंद्रित रही जहां अमेरिकी ठिकाने हैं।