पीएम मोदी के पंजाब दौरे से पहले ट्रेन पर खालिस्तानी नारे लिखे गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब आने वाले दौरे से ठीक पहले फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन के कोच पर खालिस्तानी नारे लिखे मिले हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे दिख रहे हैं।

प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस वीडियो को जारी करते हुए पंजाब के पुराने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का जिक्र किया है। वीडियो में उन्होंने 1980-90 के दशक के दौरान पंजाब में हुए कथित फर्जी मुठभेड़ों और लावारिस शवों के मुद्दे को उठाया है।

रेलवे पुलिस (जीआरपी) और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि नारे लिखने वालों की पहचान हो सके। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

पीएम का प्रस्तावित दौरा

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 15 या 17 जुलाई को पंजाब पहुंच सकते हैं। वे जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण का उद्घाटन करने के साथ चंडीगढ़ में भी कुछ विकास परियोजनाओं का लोकार्पण कर सकते हैं। इस यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है।

जसवंत सिंह खालड़ा का मुद्दा

जसवंत सिंह खालड़ा 1990 के दशक में पंजाब के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा कथित तौर पर गायब किए गए युवकों और उनके शवों को लावारिस बताकर जलाने के मामलों को उजागर किया था। उन्होंने अमृतसर समेत आसपास के जिलों में सैकड़ों ऐसे शवों का ब्योरा सार्वजनिक किया था। कुछ समय बाद 1995 में उनकी भी गुमशुदगी हुई और बाद में हत्या की पुष्टि हुई।

‘सतलुज’ फिल्म पर विवाद

इसी जसवंत सिंह खालड़ा की जीवन गाथा पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ (पहले पंजाब 95 के नाम से चर्चित) को ZEE5 पर रिलीज के महज दो दिन बाद हटा दिया गया। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता को प्रभावित करने वाले कंटेंट का हवाला देते हुए इसे प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया।

फिल्म को लेकर पंजाब में मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ संगठन इसे सच्ची घटनाओं का चित्रण बताते हुए बैन का विरोध कर रहे हैं, जबकि आलोचक इसे एकतरफा और संतुलित नजरिए की कमी वाला बता रहे हैं।