लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि इसकी अनुमति किसने दी।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल छात्र साहिल को अपने साथ रखा। साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र है, जिसकी कथित तौर पर एक आंख पैलेट गन से बुरी तरह प्रभावित हुई है। राहुल ने बताया कि साहिल पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था, लेकिन पेपर लीक होने से उसका भविष्य संकट में पड़ गया। प्रदर्शन के दौरान तिरंगा हाथ में लेकर खड़े साहिल पर गोली चलाई गई, जिससे उसकी दृष्टि पर असर पड़ा है।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रही है, लेकिन सैकड़ों युवा ऐसे घायल हुए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी का जिम्मेदार बताया और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। साथ ही, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने की अपील की। राहुल ने अमित शाह को पत्र लिखकर पैलेट गन चलाने के आदेश की जानकारी मांगी है और संसद में इस मुद्दे को उठाने का ऐलान किया।
पेपर लीक पर सख्ती: 10 साल तक की जेल का प्रावधान
दूसरी ओर, पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिमंडल ने परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने वाले कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों को 5 से 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित गिरोहों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट से समयबद्ध सुनवाई का भी इंतजाम किया जाएगा।
CJP के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और मंत्री के इस्तीफे की मुख्य मांगें हैं। सरकार के इस फैसले को आंदोलन का नतीजा माना जा रहा है, हालांकि CJP प्रदर्शन जारी रखने का संकेत दे रही है।