मध्य प्रदेश में मानसून अपडेट: चित्रकूट की सड़कें नदी बनीं, जोहिला डैम से पानी छोड़ा

मध्य प्रदेश के विंध्य और पूर्वी क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। नदियों और नालों का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, सड़कें डूब गई हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई जगहों पर शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए हैं।

डिंडौरी और पन्ना में शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश

डिंडौरी जिले में बीते 24 घंटों में करीब छह इंच वर्षा दर्ज की गई। नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया। पुलों पर पानी चढ़ने की खबरें आईं। जिला प्रशासन ने आंगनवाड़ी केंद्रों सहित नर्सरी से उच्च कक्षाओं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी।

पन्ना में भी मौसम विभाग के रेड अलर्ट और लगातार बारिश को देखते हुए कलेक्टर ने गुरुवार (20 अगस्त) को नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी सरकारी, निजी और केंद्रीय विद्यालयों में अवकाश का आदेश जारी किया। आंगनवाड़ी केंद्रों को भी प्रभावित क्षेत्रों में बंद रखने के निर्देश दिए गए। शिक्षकों को उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है।

चित्रकूट में सड़कों पर नावें दौड़ीं

सतना जिले के चित्रकूट इलाके में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से डेढ़ से दो मीटर ऊपर पहुंच गया। रामघाट का प्लेटफॉर्म पूरी तरह पानी में डूब गया। पुरानी लंका तिराहा और आसपास के इलाकों में सड़कें नदी में बदल गईं, जहां आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। आरोग्य धाम मार्ग और भरतघाट-रामघाट रपटे पर पांच-छह फीट पानी भरने से यातायात ठप हो गया। कई तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।

सतना में चरवाहा बहने की घटना

सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भूमकहर गांव में बुधवार को 55 वर्षीय चरवाहा रमैना बरसाती नाले में बह गया। वह मवेशी चराने गया था और नाला पार करते समय तेज धारा की चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और होमगार्ड की टीमें मौके पर पहुंचीं। कई घंटों की तलाश के बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिला।

जोहिला डैम के गेट खोले गए

उमरिया जिले में जोहिला डैम का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन ने गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की। हालिया जानकारी के अनुसार तीन गेट दो-दो मीटर तक खोले गए, जिससे आसपास के नदी-नालों में पानी और बढ़ गया। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।