यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। तीनों देशों ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को सक्रिय करते हुए सऊदी अरब में सैन्य बलों और आवश्यक क्षमताओं की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई है।
5 अक्टूबर 2026 को रियाद में मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धताओं को तुरंत अमल में लाया जाएगा। तीनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय कानूनों के तहत सहमत सैन्य बल और संसाधन सऊदी अरब में तेजी से भेजने के उपाय करेंगे।
सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बैठक के बाद कहा कि तीनों देशों ने राज्य की सुरक्षा और पवित्र स्थलों के खिलाफ हो रहे हमलों का मिलकर मुकाबला करने का संकल्प दोहराया है। किसी भी तरह के हमले या धमकी को पूरी तरह अस्वीकार किया गया।
पिछले महीने का रुख
सितंबर में जब हूती हमले बढ़े थे, तब पाकिस्तान ने यमन में सीधी सैन्य कार्रवाई से इनकार कर दिया था। इस्लामाबाद का रुख यह था कि समझौता केवल रक्षात्मक है और बल केवल सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अब तीनों देशों ने सऊदी अरब में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का फैसला लिया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान और तुर्किये की मौजूदगी है, लेकिन मुख्य लड़ाई सऊदी सेना ही लड़ रही है। दोनों देश टोही और अन्य सहायता मुहैया करा रहे हैं।