मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में, हाईकोर्ट के वकील अनिल मिश्रा द्वारा डॉ. अंबेडकर पर की गई विवादास्पद टिप्पणी ने ग्वालियर-चंबल अंचल में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है।
मिश्रा के बयान के बाद, दलित संगठनों ने 15 अक्टूबर को ग्वालियर में कड़ा विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है, जिसके लिए सोशल मीडिया पर लगातार लोगों से शहर पहुँचने की अपील की जा रही है। वहीं, सवर्ण समाज के संगठनों ने भी इसी दिन ग्वालियर पहुँचकर शक्ति प्रदर्शन करने की बात कहकर टकराव की आशंका को बढ़ा दिया है।
प्रशासन सतर्क, कानूनी शिकंजा कसा
दोनों पक्षों की सोशल मीडिया पर की जा रही अपीलों को देखते हुए ग्वालियर पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं पुलिस ने किसी भी तरह के बलवा और उपद्रव से निपटने के लिए मॉक ड्रिल की है। जिला प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत अब बगैर अनुमति कोई भी धरना-प्रदर्शन, जुलूस या चल समारोह नहीं निकाला जा सकेगा। पुलिस की सायबर टीम सोशल मीडिया पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। पुलिस ने अब तक 260 भड़काऊ पोस्टों को हटाया है और 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए हैं। विवादित बयान देने के चलते वकील अनिल मिश्रा के खिलाफ ग्वालियर और महाराष्ट्र में अलग-अलग दो FIR दर्ज हो चुकी हैं।
विवादित बयान और प्रतिमा का मुद्दा
यह विवाद मुख्य रूप से ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग से जुड़ा है। आजाद समाज, भीम आर्मी, ओबीसी महासभा सहित वकीलों का एक समूह प्रतिमा लगाने की मांग कर रहा है, जबकि वकीलों का दूसरा धड़ा इसके विरोध में है। पुलिस द्वारा दर्ज FIR के मुताबिक, वकील अनिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में डॉ. अंबेडकर को ‘अंग्रेजों का गुलाम-एजेंट’ और ‘झूठा’ कहने के साथ ही अन्य आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
शांति समिति की बैठक और कड़े निर्देश
तनाव कम करने के लिए, कलेक्टर रुचिका चौहान और एसएसपी धर्मवीर सिंह ने शहर के व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ शांति समिति की बैठक की। बैठक में 15 अक्टूबर को कोई भी कार्यक्रम न किए जाने पर सहमति बन गई है। एसएसपी सिंह ने कहा कि भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर सायबर टीम की नजर है और बिना अनुमति आयोजन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर चौहान ने शांति समिति सदस्यों को भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को समझाने और बिना अनुमति कोई भी आयोजन न होने देने के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन और पुलिस किसी भी स्थिति में ढिलाई छोड़ने के मूड में नहीं है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।