पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय के लोगों ने एक ऐतिहासिक मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे के विरोध में बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. उनका आरोप है कि हैदराबाद के मूसा खातियान जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर की 6 एकड़ जमीन को अवैध तरीके से हड़प लिया गया है और उस पर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है, जिससे हिंदू समुदाय में भारी गुस्सा है.
मूसा खातियान में जोरदार प्रदर्शन, महिलाएं और बच्चे भी शामिल
रविवार को सिंध के मूसा खातियान जिले में, जो पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची से मात्र 185 किलोमीटर दूर है, हिंदू समुदाय का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. इस प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जो अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. यह धरना प्रदर्शन पाकिस्तान दलित इत्तेहाद के आह्वान पर किया जा रहा है, जो पाकिस्तान में हिंदुओं के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से लड़ता है.
श्मशान घाट की जमीन पर भी कब्जे का आरोप
हिंदू समुदाय की नेता शीतल मेघवार के अनुसार, मूसा खातियान में मौजूद यह ऐतिहासिक मंदिर सदियों पुराना है. उन्होंने बताया, “मंदिर की 6 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है, और अब वहां निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है.” पाकिस्तान दलित इत्तेहाद के एक अन्य नेता राम सुंदर ने अपनी बात रखते हुए कहा, “यह मंदिर हमारे लिए बेहद पवित्र है. हालांकि, कुछ बिल्डरों ने यहां अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. उन्होंने मंदिर के पास बने हिंदुओं के श्मशान घाट की जमीन पर भी कब्जा कर लिया है.”
पुलिस पर मूक दर्शक बने रहने का आरोप, सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिल्डर सिंध के एक प्रभावशाली समुदाय, काशखेली से ताल्लुक रखते हैं, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं.
पाकिस्तान दलित इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव काछी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हमने बिल्डरों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन के पास शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन इस मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई. राजनीतिक प्रभाव के कारण बिल्डरों ने मंदिर की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है. अब आलम यह है कि हिंदू भक्त अपने पवित्र शिव मंदिर में पूजा के लिए भी नहीं जा पा रहे हैं.” यह घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.