मंत्रालय और सतपुड़ा भवन में ओएसडी को पदस्थ करने उच्च शिक्षा विभाग काफी जद्दोजहद कर रहा है। पूर्व में विभाग ने ओएसडी के लिये एमबीए, एचआर, एमटेक, बीटेक, एलएलएम, बीएएलएलबी और बीएससी एलएलबी डिग्रीधारी प्रोफेसरों के आवेदन तक जमा कराए थे। विभाग को एमबीए, एचआर, एमटेक, बीटेक डिग्रीधरी प्रोफेसर नहीं मिले।
मंत्रालय के चार और सतपुड़ा भवन में स्थित संचालनालय के 13 ओएसडी पदों पर एमबीए, एचआर, एमटेक, बीटेक, एलएलएम, बीएएलएलबी और बीएससी-एलएलबी डिग्री पूर्ण कर चुके प्रोफेसरों की आवश्यकता है। उनके अभाव में विभाग के कार्य काफी प्रभावित हो रहे हैं। विभाग में काफी कार्य लंबित पड़े हुए हैं। वर्तमान में जो ओएसडी कार्यरत हैं, वे यहां से छूटकारा हासिल पाने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आयुक्त निशांत बरबड़े उन्हें छोड़ना ही नहीं चाहते हैं।
संचालनालय में रहना नहीं चाहते ओएसडी
ओएसडी उन्हें मुक्त होने के लिए कई बार मिन्नते कर चुके हैं। ओएसडी का कहना है कि वे संचालनालय में रहना नहीं चाहते हैं। उन्हें फाइलों से ज्यादा कॉलेजों में विद्यार्थियों से अध्ययन कराने में ज्यादा रुचि आती है। आयुक्त बरबड़े उन्हें छोड़ना ही नहीं चाहते हैं। जबकि संचालनालय में अवकाश शनिवार और रविवार के दिन भी कार्य करने आना पड़ रहा है।
पूर्व में जमा हुए थे 54 आवेदन
विभाग में ओएसडी के तौर पर पदस्थापना करने विभाग को 54 आवेदन ही मिले थे। इसमें से पचास फीसदी आवेदन को स्क्रूटनी में बाहर कर दिये गये हैं। शेष 29 आवेदनों को साक्षात्कार के लिये बुलाया गया है। विभाग ने 29 प्रोफेसरों की स्कू्रटनी बरीकी से नहीं की है। इसमें कुछ प्रोफेसर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ क्रय मामले में लापरवाही बरतने पर कई आरोपों को झेल रहे हैं। वर्तमान मे कार्यरत ओएसडी काफी आरोपों में घिरे होने के बाद भी कुर्सियों पर जमे हुए हैं।