New Waiting Rules In railway: इस 1 जुलाई से भारतीय रेलवे ने वेटिंग टिकट को लेकर नए नियम लागू किए है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे अब केवल 25 प्रतिशत सीटों पर ही वेटिंग टिकट जारी कर रहा है, जिसके चलते कई ट्रेनों में “नो रूम” की स्थिति बन गई है। इसका असर खासकर उन यात्रियों पर पड़ सकता है जो अचानक यात्रा करने का फैसला करते हैं और उन्हें अब तत्काल टिकट ही एकमात्र विकल्प नजर आ रहा है
जनरल टिकट की बढ़ेगी बिक्री
जब एसी या स्लीपर में सीट नहीं मिलेगी, तो यात्री जनरल टिकट खरीदकर सफर करेंगे। इससे ट्रेनों में भीड़ बढ़ेगी, खासकर स्लीपर कोच में, जहां अक्सर टीटीई घंटों तक नहीं आता। नतीजा ये निकलेगा कि बिना रिजर्वेशन वाले यात्री स्लीपर डिब्बों में घुस जाएंगे, जिससे नियमित यात्रियों को असुविधा होगी।
तत्काल टिकट बनेगा सहारा
इस नियम के बाद अब यात्रियों की पूरी उम्मीद तत्काल टिकट पर टिकी रहेगी। इससे टिकट दलालों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। आमतौर पर ये दलाल सुबह से ही टिकट काउंटरों के बाहर लाइन में लग जाते हैं और फर्जी तरीके से टिकट बुक करते हैं, जिससे आम यात्री को टिकट मिलना और कठिन हो जाता है।
करंट टिकट से अंतिम उम्मीद
वेटिंग में कटौती के चलते करंट टिकट की उपयोगिता बढ़ गई है। यात्री अब ट्रेन के प्रस्थान से कुछ देर पहले मिलने वाले करंट टिकट के लिए आखिरी समय तक इंतजार करते हैं। हालांकि, इसमें भी सफलता की संभावना सीमित रहती है।
नियम का उद्देश्य रिजर्वर्ड कोटा के यात्रियों को परेशानी मुक्त यात्रा
इस बदलाव का उद्देश्य है कि आरक्षित श्रेणी के यात्री बिना परेशानी यात्रा कर सकें और लंबी वेटिंग की सूची से छुटकारा मिल सके। रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, यह कदम यात्रियों को कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन अचानक यात्रा करने वालों के लिए यह नियम मुश्किलें बढ़ा सकता है।