Amarnath yatra: 3 जुलाई को शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था बुधवार सुबह जम्मू के भगवती नगर बसे कैंप से रावण हो गया। उपराज्यपाल ने हरि झंडी दिखाकर जत्थे को रवाना किया। ये यात्रा 38 दिन तक चलने वाली है जो 9 अगस्त रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। इस यात्रा में लगभग 3.5 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है ऑफलाइन और ऑनलाइन मोड से।
पंजाब के पठानकोट से भी यात्रियों को रवाना किया गया जहां से सभी श्रद्धालु बालताल होकर बाबा बर्फानी की गुफा पहुंचेंगे। यात्रा का शुभारम्भ हर-हर महादेव और बम भोले के नारे के साथ हुआ जहां सभी श्रद्धालुओं में उत्साह और हर्षोल्लास देखने को मिला। पिछले साल अमरनाथ यात्रा 52 दिन चली थी जिसमें करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
अमरनाथ का यात्रा का पवित्र रूट
बाबा बर्फानी की गुफा तक पहुंचने के लिए दो रूट हैं – पहलगाम और बालटाल। पहलगाम रूट को लंबा लेकिन आसान माना जाता है क्योंकि इसमें समय थोड़ा ज़्यादा लगता है पर कठिनाई कम रहती है। इसमें सबसे पहला पड़ाव चंदनवाड़ी आता है जो बसे कैंप है 16 कीमि की दूरी पर है। यहां से चढ़ाई के बाद पिस्सू टॉप आता है जहां से यात्रा शेषनाग पहुंचती है। अगले दिन शेषनाग से सभी यात्री पंचतरणी जाते हैं जहां से अमरनाथ गुफ़ा बस 6 कीमि रह जाती है।
दूसरा रूट है बालटाल का जो छोटा तो है पर इसमें कठिनाई ज्यादा है। बाबा बर्फानी गुफ़ा जल्दी पहुंचने के लिए ज़्यादातर ये रूट चुना जाता है। इस रास्ते पर खतरनाक मोड और खड़ी चढ़ाई रहती है जो वृद्धों के लिए ठीक नहीं। इस रूट की दूर लगभग 14 कीमि है जिससे गुफ़ा जल्दी पहुंचा जा सकता है।
ऐसे रखें सुरक्षा का ध्यान
श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान आधार कार्ड, 4 पासपोर्ट फोटो, मेडिकल सर्टिफिकेट और RFID कार्ड, ट्रेवल रजिस्ट्रेशन फॉर्म, साथ रखना जरूरी है। साथ ही गर्म कपड़े, रेनकोट, दवाइयां और ट्रैकिंग स्टिक, स्पोर्ट शूज, पानी बोतल जैसे जरूरी सामान भी लेकर चलना चाहिए। इसके साथ ही अपनी सेहत का पूरा ध्यान दें और रोज़ाना 3 से 4 कीमि चलने की प्रैक्टिस करें।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंतेज़ाम
CRPF ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सेटअप लागू किया है। जैमर का इस्तेमाल किया गया है हाइवे पर ताकि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों पर कंट्रोल रखा जा सके। इसके अलावा चेहरा पहचानने के लिए सिस्टम (FRS) भी एक्टिव है, जो ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध लोगों की पहचान करेगा। इसके अलग अलग जगह K-9 डॉग स्क्वॉड और CCTV कैमरों की मदद से नज़र रखी जा रही है। जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव अतुल डुल्लू ने खुद व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और सामुदायिक रसोई, मेडिकल सुविधाएं और बोर्डिंग व्यवस्था का जायजा लिया। हर यात्री की ट्रैकिंग के लिए RFID की तकनीक से करने को कहा मुख्य सचिव ने ताकि ज़रूरत के वक्त मदद पहुंच सके।