Five people burnt alive in Bihar: बिहार से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। अंधविश्वास और कुरीतियों के चलते एक ही परिवार के पांच लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार पर ‘डायन’ होने का आरोप लगाते हुए पहले जमकर मारपीट की और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया।
यह दर्दनाक घटना बिहार के रजीगंज पंचायत के टेटगामा आदिवासी गांव की है, जो मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित परिवार को पहले गांव की भीड़ ने घेर लिया। आरोप था कि परिवार की एक महिला टोना-टोटका करती है और गांव में बीमारियों तथा मौतों की वजह वही है। इसी अंधविश्वास के चलते पूरे परिवार को निशाना बनाया गया।
गांव में पसरा है सन्नाटा, आरोपी फरार
हत्याकांड की यह घटना बाबूलाल उरांव के घर की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार को मारने के बाद जिंदा जलाने की यह वारदात उसी के घर में अंजाम दी गई। इस जघन्य कृत्य के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल है। स्थानीय लोग डरे-सहमे हैं और आसपास के घरों में ताले लटके हैं। आरोपियों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है क्योंकि घटना के बाद से गांव के कई लोग फरार हैं।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) और मुफ्फसिल थाना प्रभारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया है और गांव में कैंप कर रही है ताकि किसी भी तरह की और हिंसा या तनाव को रोका जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की, वहीं इस निर्मम हत्याकांड के पीछे के कारणों और दोषियों की पहचान के लिए गहन जांच शुरू कर दी गई है।
अंधविश्वास बना जानलेवा, कब थमेगा यह सिलसिला?
यह कोई पहली बार नहीं है जब बिहार या देश के अन्य हिस्सों में अंधविश्वास के नाम पर ऐसी भयावह घटना सामने आई हो। डायन बताकर महिलाओं और परिवारों पर अत्याचार करने की प्रवृत्ति वर्षों से चली आ रही है, लेकिन आधुनिक समाज में भी इस तरह की मानसिकता और कृत्य चिंता का विषय हैं।
सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो यह साफ जाहिर होता है कि जमीनी स्तर पर अभी बहुत कुछ करना बाकी है। खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और जागरूकता की कमी लोगों को ऐसे वहशी कदम उठाने पर मजबूर कर देती है।
न्याय की मांग तेज, सरकार पर सवाल
इस निर्मम हत्या पर अब विभिन्न सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गहरा आक्रोश जताया है। वे सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाए। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता अभियान चलाकर अंधविश्वास के खिलाफ जनमत तैयार करने की भी अपील की जा रही है।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था की परीक्षा है, बल्कि यह भी एक चेतावनी है कि अगर समय रहते समाज को अंधविश्वास से बाहर नहीं निकाला गया, तो इसके और भी भयानक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।