Marker Test for Cancer: पूरी दुनिया में हर साल लगभग 6 करोड़ लोगों की मौत होती है। हर साल कैंसर के कारण दुनिया में करीब 1 करोड़ लोगों की मौत होती है। इसका मतलब है कि दुनिया में हर छठी मौत कैंसर के कारण होती है। ज्यादातर कैंसर के मामले तीसरी-चौथी स्टेज में पता चलते हैं।
इसलिए इसका इलाज मुश्किल हो जाता है और ज्यादातर लोगों की मौत हो जाती है। अगर शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता चल जाए तो इसका इलाज काफी हद तक आसान हो सकता है और कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। कैंसर या ट्यूमर का समय पर पता लगाने के लिए मेडिकल साइंस में कुछ तरीके हैं। इनमें से एक है- ट्यूमर मार्कर टेस्ट। यह ब्लड या बॉडी फ्लूड टेस्ट है, जिसकी मदद से कैंसर सेल्स से जुड़े कुछ खास प्रोटीन या जेनेटिक बदलावों को पहचाना जा सकता है।
हर साल बढ़ रहे कैंसर के मामले
साल 2022 में 2 करोड़ लोगों को कैंसर हुआ और लगभग 97 लाख लोगों की इससे मौत हो गई। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, साल 2050 तक दुनिया में हर साल 3.3 करोड़ नए कैंसर केस आ सकते हैं और इससे मौत का आंकड़ा 1.82 करोड़ तक पहुंच सकता है। ट्यूमर मार्कर टेस्ट की मदद से मौतों का आंकड़ा कम हो सकता है।
क्या है ट्यूमर मार्कर टेस्ट?
ट्यूमर मार्कर टेस्ट ब्लड या बॉडी फ्लूइड के जरिए शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लगाने का तरीका है। ट्यूमर मार्कर टेस्ट में आमतौर पर प्रोटीन को मापा जाता है। शरीर की सामान्य कोशिकाएं ये प्रोटीन बनाती हैं, लेकिन कैंसर कोशिकाएं इन्हें बहुत अधिक मात्रा में बनाने लगती हैं। कोशिकाओं की यह असामान्य एक्टिविटी ही ट्यूमर या कैंसर की ओर इशारा करती है।ट्यूमर मार्कर टेस्ट पूरी तरह कैंसर की पुष्टि नहीं कर सकता है, लेकिन यह शुरुआती संकेत देता है कि शरीर में कुछ गड़बड़ हो रही है।
अगर ट्यूमर मार्कर का लेवल सामान्य से बहुत ज्यादा है तो डॉक्टर कैंसर की आशंका को लेकर आगे की जांचे जैसे- बायोप्सी, टफक या उळ स्कैन कराने की सलाह दे सकते हैं। ये टेस्ट शुरुआती स्टेज में कैंसर पहचानने में मदद करते हैं और बाकी टेस्ट्स के लिए रास्ता साफ करते हैं। ट्यूमर मार्कर सिर्फ बीमारी की पहचान में ही मदद नहीं करते हैं, बल्कि इलाज के असर को जांचने में, बीमारी के दोबारा होने पर इसका पता लगाने और सही इलाज तय करने में भी मदद करते हैं। अगर इलाज के बाद टेस्ट होने पर ट्यूमर मार्कर घट रहे हैं, तो मतलब है कि इलाज असरदार है। अगर इलाज के बाद कुछ समय में ये फिर से बढ़ने लगे तो समझा जा सकता है कि कैंसर वापस लौट रहा है।