Urea Crisis in MP: बोवनी के समय प्रदेश का अन्न दाता डीएपी और यूरिया खाद के लिए परेशान है। मौजूदा हालात यह हैं कि माालवा, महाकोशल, विंध्य, बुंदेलखड़, मलावा, बघेलखंड के अधिकांश जिलों में यूरिया खाद का संकट गहराता जा रहा है। ऐसी शिकायतें संभागीय बैठकों में भी जिलाध्यक्षों की तरफ से आ रहीं हैं। आलम ये है कि किसान हाथ में सेवा सहकारी समिति मर्यादित द्वारा बनाए गए परमिट लिए घूम रहा है, लेकिन खाद उन्हें नहीं मिल रही है। समिति प्रबंधक के साथ विक्रेता जल्द ही रेक आने का भरोसा दिला किसान को फिलहाल खाली हाथ लौटा रहे हैं। सांसदों-विधायकों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा डबल लॉक सहित सेंट्रल लॉक में संबंधित अधिकारी को कॉल करने पर किसान को 1 से 2 बोरी खाद मिल रही है।
इन जिलों में खाद की किल्लत
जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, अलीराजपुर, खंडवा, नर्मदापुरम, नीमच, बेतूल, खरगौन, पन्ना, रतलाम, सागर, शिवुपरी,धार, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, नरसिंहपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, कटनी सहित मंडला की सहकारी समितियों में खाद की किल्लत को देखते हुए बाजार में अमानक खाद बेचने वाला गिरोह भी सक्रिय है। निर्धारित सरकारी कीमत से 50 से 80 रुपए प्रति बोरी कीमत बढाकर व्यापारी खाद् बेच रहा है। प्राइवेट डीलर अपने खर्चे निकालकर अधिकतम कितनी कीमत तक किसानों को यूरिया-डीएपी बेच सकता है, इसका कोई निर्धारण या नियम नहीं है।
प्रायवेट में अधिक कीमत
किसानों का कहना है कि खाद-बीज की प्राइवेट दुकानों में अधिक कीमत में खाद मिल रही है। किसानों का आरोप है कि व्यापारियों को लाभ दिलाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा खाद का संकट खड़ा कर दिया जाता है। कुछ दिन बाद यही खाद सरकारी गोदामों में भरपूर मात्रा में मिलने लगती है, जब तक किसान प्राइवेट डीलर से खाद् लेकर खेत में छिड़काव कर चुका होता है। यूरिया खाद के लिए किसान जनपद/जिला सदस्य एवं अध्यक्ष सहित विधायकों से जुगाड़ लगा रहे हैं।
कैसे हो फसल की ग्रोथ
धान का रोपा लगने के बाद फसल की ग्रोथ और हरियाली बनाए रखने के लिए यूरिया का संकट गहराने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी समितियों की अधिकांश गोदामों में बीते 5 दिनों से यूरिया नहीं है, सिर्फ डबल लॉक में उपलब्ध है। बड़े किसान मंहगे दाम में प्राइवेट दुकानों से डीएपी-यूरिया खरीदकर खेतों में डाल रहे हैं। सरकारी गोदाम को छोड़कर प्राइवेट खाद् विक्रेताओं के पास यूरिया का भरपूर स्टाक कैसे है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। किसान निजी फर्म से अधिक दाम देकर खाद खरीद भी रहे हैं। खाद-बीज का कारोबार करने वाले सिंडीकेट बनाकर किसानों को अमानक खाद भी बेच रहे, जिसे देखने वाला फिलहाल कोई नहीं है।