Thailand-Cambodia border dispute: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर उग्र रूप में सामने आया है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच गुरुवार सुबह भारी गोलीबारी हुई, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई। थाई अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में 11 आम नागरिक हैं, जिनमें एक आठ साल का बच्चा और 15 वर्षीय किशोर भी शामिल है। वहीं एक सैनिक की भी मौत हुई है। ये सभी थाईलैंड के सुरिन, उबोन रत्चथानी और सिसाकेत प्रांतों से बताए जा रहे हैं। कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कंबोडिया की ओर से अब तक हताहतों की कोई पुष्टि नहीं की गई है।
गोलीबारी से शुरू हुई झड़प, फिर रॉकेट और एयर स्ट्राइक तक मामला पहुंचा
गुरुवार की सुबह दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें उस समय शुरू हुईं जब सीमा पर तैनात थाई सैनिकों ने दावा किया कि कंबोडिया की सेना ने ड्रोन के जरिए उनकी गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी थी। इसके बाद रॉकेट लॉन्चर से लैस कंबोडियाई सैनिक सीमा के पास पहुंच गए।
थाई सैनिकों ने पहले बातचीत की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी, तो कंबोडियाई सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद थाई सैनिकों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। थाई अधिकारियों ने बताया कि कंबोडिया ने BM-21 रॉकेट लॉन्चर और तोपखाने जैसे भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे सीमा के पास स्थित घरों, एक अस्पताल और पेट्रोल पंप को नुकसान पहुंचा। बदले में थाईलैंड ने भी कंबोडियाई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
कंबोडिया का पलटवार: “थाई सेना ने पहले हमला किया”
हालांकि कंबोडिया ने थाईलैंड के आरोपों को नकारते हुए दावा किया है कि संघर्ष की शुरुआत थाई सेना ने की थी। कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता के अनुसार, थाई सैनिक सुबह करीब 6:30 बजे एक प्राचीन खमेर-हिंदू मंदिर के पास पहुंचे और वहां कंटीली तारें बिछा दीं, जो एक पुराने समझौते का उल्लंघन था।
इसके बाद 7:00 बजे थाई सेना ने ड्रोन उड़ाया और 8:30 बजे हवा में फायरिंग की। फिर 8:46 पर उन्होंने “पहले हमला” किया, जिससे कंबोडियाई सैनिकों को आत्मरक्षा में जवाब देना पड़ा। कंबोडिया ने भी थाईलैंड पर भारी हथियारों और अत्यधिक सैनिक बल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
सीमा बंद, हजारों लोगों का पलायन
तनाव के बढ़ते हालात को देखते हुए थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ अपनी सीमा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। वहीं कंबोडिया ने थाईलैंड से अपने कूटनीतिक संबंधों को डाउनग्रेड कर दिया है।
दोनों देशों ने सीमा के पास रहने वाले नागरिकों को हटने का निर्देश दिया है। थाईलैंड ने अब तक लगभग 40,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
विवाद की जड़ें: एक सदी पुराना सीमा संघर्ष
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह विवाद कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें 100 साल से भी अधिक पुरानी हैं, जब फ्रांसीसी उपनिवेश काल के बाद सीमाओं का निर्धारण किया गया था। 2008 में यह विवाद उस समय गंभीर रूप ले बैठा जब कंबोडिया ने सीमा क्षेत्र में स्थित 11वीं सदी के एक मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पंजीकृत कराने की कोशिश की। थाईलैंड ने इसका कड़ा विरोध किया और इसके बाद से दोनों देशों के बीच कई बार झड़पें हो चुकी हैं।
हाल ही में मई में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद से तनाव और बढ़ गया है। इसके बाद से दोनों देशों ने एक-दूसरे पर व्यापार और सेवाओं पर रोक लगाई है।
राजनीतिक अस्थिरता से हालात और बिगड़े
इस पूरे घटनाक्रम में दोनों देशों की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता भी तनाव को बढ़ा रही है। कंबोडिया में नए प्रधानमंत्री हुन मानेट की पकड़ अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। वहीं उनके पिता और पूर्व तानाशाह हुन सेन इस मुद्दे को राष्ट्रीय गर्व और नेतृत्व दिखाने के मौके के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
दूसरी ओर, थाईलैंड में भी एक अस्थिर गठबंधन सरकार काम कर रही है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री थक्सिन शिनावात्र का समर्थन प्राप्त है। थक्सिन कभी हुन सेन के करीबी माने जाते थे, लेकिन हाल ही में हुए निजी बातचीत के लीक होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में दरार आ गई है।
क्या युद्ध के हालात बन सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि संघर्ष गंभीर है, लेकिन यह पूर्ण युद्ध में बदलने की संभावना कम है। फिर भी मौजूदा हालात में दोनों देशों में ऐसा कोई नेतृत्व नहीं है जो मजबूत इच्छाशक्ति के साथ पीछे हटने का निर्णय ले सके।
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों और कूटनीतिक प्रयासों के तहत ही समाधान संभव है। लेकिन यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सीमा पर और बड़ी मानवीय त्रासदी हो सकती है।