छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण: 66 विद्रोहियों ने डाले हथियार, महिला कमांडरों समेत लाखों के इनामी शामिल

Surrender of 66 Naxalites in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य के पांच संवेदनशील जिलों – सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर – में कुल 66 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर शांति की राह चुनी है। आत्मसमर्पण करने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जिनमें कई वर्षों से नक्सल आंदोलन में सक्रिय रही महिला माओवादी भी हैं।

सरकार की पुनर्वास नीति ‘नीयद नेल्ला नार’ और आत्मसमर्पण प्रोत्साहन योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने को तैयार हो रहे हैं। राज्य सरकार की योजना का उद्देश्य है कि नक्सलियों को हिंसा और डर के वातावरण से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सरकार से मिली प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास की गारंटी

राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है। इसके अलावा पुनर्वास के तहत उन्हें सुरक्षा, आवास, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापना जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। ये प्रयास ना सिर्फ माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने में मदद कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।

सुकमा में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की गतिविधियां

सुकमा जिले में गुरुवार सुबह पांच नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इन पर पुलिस दलों की रेकी करने, सड़कों पर आईईडी लगाने और मार्ग अवरुद्ध करने जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। आत्मसमर्पण के साथ ही उन्हें राज्य सरकार की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई और अब पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

नारायणपुर में संगठन के भीतर टूट का खुलासा, 33 लाख के इनामी नक्सलियों ने छोड़ा साथ

नारायणपुर जिले में मुकेश नामक नक्सली के नेतृत्व में आठ माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें चार महिलाएं भी शामिल रहीं। सभी पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुकेश ने स्वीकार किया कि संगठन के भीतर असंतोष और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है, जिसके चलते वह हिंसा छोड़कर समाज में लौटने का निर्णय ले रहा है।

कांकेर में इनामी नक्सलियों ने टेका हथियार, पुलिस को मिली बड़ी सफलता

कांकेर जिले में भी नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली जब 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें पांच महिलाएं थीं और सभी पर कुल 62 लाख रुपये तक का इनाम था। इन नक्सलियों में एक कंपनी कमांडर भी शामिल था, जिसने वर्षों तक क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व किया। इस आत्मसमर्पण से उत्तर बस्तर में माओवादियों के नेटवर्क को करारा झटका लगा है।

बीजापुर में तीन दशकों से सक्रिय रहे नक्सलियों ने छोड़ी बंदूकें

बीजापुर जिले में स्थिति और भी अधिक उत्साहजनक रही, जहां गुरुवार को 25 माओवादी आत्मसमर्पण के लिए सामने आए। ये सभी नक्सली तीन दशकों से संगठन में सक्रिय थे और उन पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 15 लाख रुपये का इनाम था। इनमें 13 महिलाएं थीं। आत्मसमर्पण करने वालों में कई शीर्ष रैंक के सदस्य भी थे, जिनमें SZCM, DVCM, ACM, कंपनी सदस्य और जनताना सरकार के पदाधिकारी शामिल थे।

इनमें से सबसे बड़ा नाम रमन्ना ईरपा उर्फ जगदीश का रहा, जिस पर अकेले 25 लाख रुपये का इनाम था और जो 2002 से ओडिशा और बस्तर में 40 से ज्यादा गंभीर घटनाओं में शामिल रहा है। बीजापुर पुलिस के अनुसार, यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के कमजोर पड़ते आधार की बड़ी पुष्टि है।

दंतेवाड़ा में “लोन वर्राटू” और “पूना मारगेम” अभियान के असर से 15 माओवादी लौटे समाज में

दंतेवाड़ा में चल रहे ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइए) और ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान के परिणामस्वरूप 15 माओवादियों ने हिंसा छोड़ने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में एक माओवादी दंपती और पांच ऐसे माओवादी भी थे जिन पर 17 लाख रुपये तक का इनाम था।

2024 की शुरुआत से अब तक नक्सल मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलता

बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक 803 नक्सलियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, वहीं 431 ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न मुठभेड़ों में 185 नक्सली मारे जा चुके हैं।

इन सभी आत्मसमर्पणों की प्रक्रिया बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, डीआईजी कमलोचन कश्यप, सीआरपीएफ के डीआईजी बी.एस. नेगी और बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव की उपस्थिति में पूरी की गई।