PESA Act became a boon in Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश के 88 आदिवासी बहुल विकासखंडों में पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरिया) अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य के जनजातीय समाज के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस कानून के तहत अब जनजातीय समुदाय के लोग अपने पारिवारिक या भूमि विवाद जैसे मामलों को थानों में शिकायत दर्ज कराए बिना ही गांव की चौपालों पर सामूहिक चर्चा के जरिए सुलझा रहे हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य भी यही है कि आदिवासी समुदाय को छोटे-छोटे मसलों के लिए पुलिस थाना या न्यायालयों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि वे अपनी परंपरागत न्याय प्रणाली के माध्यम से शांति और आपसी समझ से विवादों को सुलझा सकें।
8 हजार से अधिक प्रकरणों का हुआ निपटारा, बनी मिसाल
अब तक जनजातीय समाज ने चौपालों की मदद से करीब 8,000 से ज्यादा विवादों को सुलझाकर एक नई मिसाल कायम की है। इनमें अधिकांश मामले भूमि विवाद, पारिवारिक संपत्ति बंटवारा और अन्य सामाजिक मतभेदों से जुड़े रहे हैं।
यह पहल न सिर्फ समय और संसाधनों की बचत कर रही है, बल्कि आदिवासी समाज में पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का भी काम कर रही है। मध्यप्रदेश पेसा एक्ट को लागू करने के मामले में पूरे देश में एक आदर्श राज्य के रूप में उभरा है।
तीन स्तरों पर बनी समितियां, गांवों में ले रहीं सक्रिय भूमिका
पेसा अधिनियम के तहत राज्य सरकार ने तीन प्रमुख समितियों का गठन किया है, जो ग्रामीण स्तर पर पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रही हैं। ये समितियां हैं – शांति एवं विवाद निवारण समिति, सहयोगिनी मातृ समिति और वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति।
राज्यभर में इन समितियों की संख्या हजारों में है, जो निरंतर गांव-गांव जाकर न केवल विवादों का समाधान कर रही हैं बल्कि वन अधिकारों और महिलाओं की भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रही हैं। जनसंख्या और ग्राम पंचायतों की संख्या के अनुसार इन समितियों का गठन किया गया है।
देश के 10 राज्यों में लागू, मध्यप्रदेश बना नेतृत्वकारी राज्य
पेसा कानून को भारत के 10 राज्यों में लागू किया गया है, लेकिन जिस तरह से इसे मध्यप्रदेश ने ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाया है, वह अनुकरणीय है। भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने भी इस पहल को सराहा है और मध्यप्रदेश की दो सफल कहानियों को एक विशेष प्रकाशन में जगह दी है। इससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है।
20 जिलों के 5133 पंचायतों में लागू हो चुका है कानून
प्रदेश सरकार ने इस अधिनियम को उन 20 जिलों के 88 विकासखंडों में लागू किया है जहां जनसंख्या का बड़ा हिस्सा जनजातीय समुदाय का है। यहां की 5133 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 11,596 गांवों में पेसा कानून को लागू किया जा चुका है।
वर्तमान में करीब 4,850 पेसा मोबिलाइज़र इन क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जो गांवों में जाकर लोगों को कानून की जानकारी दे रहे हैं, चौपालों का आयोजन करवा रहे हैं और विवाद निपटान की प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर रहे हैं।
वित्तीय प्रबंधन में भी दिखा कानून का असर
पेसा कानून के तहत वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में अब तक 11,538 बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनके माध्यम से पेसा से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इससे ग्रामीण विकास योजनाओं को भी गति मिल रही है और जनजातीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।
संस्कृति और स्वशासन की रक्षा का मजबूत आधार
पेसा अधिनियम का मूल उद्देश्य केवल विवादों का समाधान ही नहीं, बल्कि जनजातीय परंपराओं, सामाजिक संरचना, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करना भी है। चौपालों के माध्यम से हो रहा न्याय इस बात का प्रमाण है कि यदि परंपरागत व्यवस्थाओं को सशक्त किया जाए, तो समाज बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं निकाल सकता है।