लोकसभा में गृह मंत्री शाह और प्रियंका गांधी के बीच तीखी बहस, इंटेलिजेंस फेलियर पर उठे सवाल

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में हुए ऑपरेशन महादेव को लेकर लोकसभा में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए तीनों आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे। शाह ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आज चिदंबरम जी को साफ तौर पर बताना चाहता हूं कि हमारे पास पक्के प्रमाण हैं, ये तीनों आतंकी पाकिस्तान से ही आए थे।”

गृहमंत्री के इस बयान के बाद जहां सत्तापक्ष ने ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी बताया, वहीं विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कमजोरी पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

प्रियंका गांधी ने खड़ा किया सवाल

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर में हुए हालिया आतंकी हमलों को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 2023 में टीआरएफ (द रेसिस्टेंस फ्रंट) को आधिकारिक रूप से आतंकी संगठन घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद यह संगठन 2020 से लेकर अब तक भारत में 41 हमले कर चुका है।

प्रियंका ने तंज कसते हुए कहा, “जब हम सब जानते थे कि यह संगठन पाकिस्तान में बैठकर हमलों की योजना बना रहा है, तब आखिर हमारी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह एजेंसियों की असफलता नहीं है?”

बैसारण घाटी में हुआ था नरसंहार, फिर भी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं

प्रियंका गांधी ने बैसारण घाटी में हुए वीभत्स हमले की घटनाओं को विस्तार से उठाते हुए कहा कि यह इलाका बेहद दुर्गम है – जहां तक पहुंचने के लिए घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से होकर गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे थे।

उन्होंने एक पीड़िता का हवाला देते हुए कहा, “शुभम द्विवेदी की पत्नी ने बताया कि जब आतंकवादियों ने एक-एक कर लोगों को चुनकर मारना शुरू किया, उस वक्त एक भी सुरक्षा बल का जवान वहां मौजूद नहीं था। सवाल ये है कि इतने संवेदनशील मार्ग पर सुरक्षा क्यों नहीं थी?”

‘सरकार ने कहा था आतंकवाद खत्म हो चुका है, फिर 22 अप्रैल को 26 लोग क्यों मारे गए?’

प्रियंका ने सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि जब देश को बताया जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद लगभग खत्म हो चुका है, तब 22 अप्रैल 2025 को आखिर ऐसा खौफनाक हमला कैसे हो गया जिसमें 26 लोगों को उनके ही परिजनों के सामने मौत के घाट उतार दिया गया?

उन्होंने कहा, “सरकार को जवाब देना होगा कि जब आतंकवाद समाप्ति की घोषणा की जा चुकी थी, तो इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या यह जनता को गुमराह करने की कोशिश नहीं थी?”

देश की रक्षा में जुटे जवानों को प्रियंका का सलाम

भले ही प्रियंका गांधी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हों, लेकिन उन्होंने देश की सुरक्षा में तैनात जवानों और अधिकारियों की सराहना करने से भी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने कहा कि “देश की एकता और अखंडता की रक्षा में हमारे जवानों का योगदान अतुलनीय है। 1948 से लेकर आज तक वे सीमाओं की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने से नहीं चूके हैं। मैं ऐसे सभी बहादुर सैनिकों को नमन करती हूं।”

सियासी गर्मी और आतंकी हमलों पर मंथन जरूरी

ऑपरेशन महादेव को लेकर जहां एक ओर सरकार अपनी उपलब्धियों को गिना रही है, वहीं विपक्ष इस पूरे मामले में खुफिया तंत्र और सुरक्षा इंतजामों की विफलता को उजागर करने की कोशिश कर रहा है। सवाल यह है कि जब एक दुर्गम क्षेत्र में हमला होता है और दर्जनों निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं, तब ज़िम्मेदारी किसकी बनती है?

अब वक्त आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और देश को साफ-साफ जवाब दे कि खामियां कहां रहीं और आगे इनसे कैसे निपटा जाएगा। साथ ही, इस बात पर भी मंथन जरूरी है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई केवल सर्जिकल ऑपरेशन तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें रणनीतिक सुधार, एजेंसियों की सक्रियता और राजनीतिक एकजुटता भी जरूरी है।