ISRO और NASA का संयुक्त मिशन NISAR लॉन्च: पृथ्वी की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी

ISRO and NASA’s joint mission NISAR launched: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने नासा (NASA) के साथ मिलकर दुनिया के सबसे महंगे सिविलियन अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट, निसार (NISAR) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है और अगले तीन वर्षों तक अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी की लगातार निगरानी करेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

श्रीहरिकोटा से GSLV F-16 रॉकेट द्वारा सफल प्रक्षेपण

निसार की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से हुई। इसे GSLV के F-16 रॉकेट का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया है, और इसे सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा। निसार को दुनिया का पहला ऐसा रडार सैटेलाइट बताया जा रहा है जो अंतरिक्ष से पृथ्वी को व्यवस्थित तरीके से मैप करेगा, जिससे मौसम या प्रकाश की स्थिति का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और यह 24 घंटे इमेजिंग प्रदान करेगा।

1.5 बिलियन डॉलर का मिशन: निरंतर निगरानी और डेटा संग्रह

1.5 बिलियन डॉलर (लगभग 12,500 करोड़ रुपये) के इस महत्वाकांक्षी मिशन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। 2392 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट को पृथ्वी से 740 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य की समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। स्वीपएसएआर (SweepSAR) तकनीक का उपयोग करते हुए, यह उपग्रह हर 12 दिनों में पृथ्वी के भूभाग और बर्फ से ढकी सतहों को स्कैन करेगा। उपग्रह में दो उन्नत रडार – एल-बैंड (L-band) और एस-बैंड (S-band) – लगाए गए हैं, जो इसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा एकत्र करने में सक्षम बनाएंगे।

प्राकृतिक आपदाओं और पारिस्थितिकी तंत्र पर NISAR का प्रभाव

निसार पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी की निरंतर निगरानी को सक्षम करेगा और भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक खतरों का सटीक आकलन करने में मदद करेगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पहली बार पृथ्वी को दोहरे आवृत्ति सिंथेटिक एपर्चर रडार (Dual-Frequency Synthetic Aperture Radar) का उपयोग करके देखेगा, जिससे पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का भी पता लगाया जा सकेगा। यह मिशन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और आपदा प्रबंधन रणनीतियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।