आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर पर जोर

भारत और सिंगापुर ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। दोनों देशों ने कई नए औद्योगिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चिप उत्पादन में सिंगापुर की हिस्सेदारी करीब 10% है, और सेमीकंडक्टर उपकरण उत्पादन में 20% है। यह भारत के लिए एक आदर्श भागीदार है, जिसका लक्ष्य साल के अंत तक अपने पहले ‘मेड-इन-इंडिया’ सेमीकंडक्टर लॉन्च करना है।

आतंकवाद पर साझा चिंता

संयुक्त बयान के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम आतंकवाद को लेकर समान चिंता साझा करते हैं। हमारा मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना सभी मानवतावादी देशों का कर्तव्य है।”

उन्होंने आगे कहा कि तकनीक और इनोवेशन दोनों देशों के मजबूत संबंधों के आधार स्तंभ हैं। मोदी ने चेन्नई में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना में सिंगापुर की भूमिका की भी सराहना की, जो उन्नत विनिर्माण के लिए मानव संसाधन विकसित करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि GIFT City अब दोनों देशों के शेयर बाजारों को जोड़ने में मदद कर रही है, जिससे वित्तीय एकीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

व्यापार और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Bilateral Comprehensive Economic Cooperation Agreement) और आसियान (ASEAN) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) की समीक्षा समयबद्ध तरीके से करने का फैसला किया है, ताकि आपसी व्यापार को बढ़ाया जा सके।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत और सिंगापुर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 34.26 बिलियन डॉलर का रहा।

लॉरेंस वों ने कहा कि सहयोग शिपिंग, नागरिक उड्डयन और उभरती प्रौद्योगिकियों तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से दोनों देशों के लिए नई विकास संभावनाएं पैदा होंगी।