इंदौर, छतरपुर के बाद जबलपुर मेडिकल कॉलेज में चूहों का हमला, 2 मरीजों के पैर कुतरे

जबलपुर: प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इंदौर और छतरपुर के बाद अब जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में भी चूहों का आतंक सामने आया है। मानसिक रोग विभाग में भर्ती दो मरीजों के पैरों को चूहों ने कुतर डाला। इस घटना ने न सिर्फ परिजनों में गुस्सा और डर पैदा कर दिया है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर गम्भीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, विभाग के भवन में रेनोवेशन का काम चल रहा है, जिसके चलते अस्थि रोग विभाग के भवन से मानसिक रोग वार्ड का संचालन किया जा रहा है। इसी भवन में यह घटना हुई।  परिजनों ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रशासन और वार्ड स्टाफ ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

केस-1: युवती को लगे 3 इंजेक्शन

सिहोरा निवासी 25 वर्षीय रजनी यादव को सिर दर्द की शिकायत पर मानसिक रोग विभाग में भर्ती किया गया था। 9 सितंबर की रात को वार्ड में चूहों ने उनके दोनों पैरों की एड़ियों को कुतर दिया, जिससे गहरे लाल निशान पड़ गए। डॉक्टर को जानकारी देने पर उन्हें रैबीज और अन्य संक्रमण से बचाव के लिए तीन इंजेक्शन लगाए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि रातभर चूहे खुलेआम वार्ड में घूमते रहे। शनिवार को रजनी को डिस्चार्ज कर दिया गया।

केस-2: महिला की एड़ी पर लगातार हमला

50 वर्षीय सरोज मेहरा को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उनके बेटे ने बताया कि भर्ती के दो दिन बाद ही चूहों ने मां की एड़ी काट ली। अगले ही दिन फिर हमला हुआ और उनके पैरों की एड़ी को नुकसान पहुँचा। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल रात की नहीं, बल्कि दिन में भी चूहे वार्ड में खुले घूमते हैं।

परिजनों ने बताया “दिन में भी घूमते हैं चूहे ”

नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव निवासी जगदीश मेहरा ने बताया कि वह अपनी मां के साथ वार्ड में मौजूद थे। रात को मां की चीख सुनकर उठे तो देखा कि चूहों ने उनके पैरों में काट लिया है। थोड़ी देर बाद उन्हीं चूहों ने जगदीश के पैरों को भी काट लिया। शिकायत करने पर भी नर्स ने ध्यान नहीं दिया।

मरीजों और परिजनों का कहना है कि वार्ड में चूहों का आतंक सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि दिन में भी बना रहता है। बड़े-बड़े चूहे खुलेआम वार्ड में घूमते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों में भय का माहौल है

डीन ने मानी लापरवाही, दिए जांच और पेस्ट कंट्रोल के आदेश

मामले की जानकारी मिलते ही विभागाध्यक्ष, अधीक्षक और डीन ने जांच के निर्देश दिए। शुरुआती जांच में सामने आया कि मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर और कर्मचारियों की भारी लापरवाही रही है।

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने कहा, “जिन मरीजों को चूहों ने काटा है, उन्हें आवश्यक उपचार दिया गया है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। पेस्ट कंट्रोल कंपनी को वार्ड में तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।”

बता दें कि हाल ही में इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजात की मौत हो गई थी। वहीं छतरपुर जिला अस्पताल में भी चूहों के डर से प्रसूता महिलाएं नवजात को आंचल में छिपाकर रखने को मजबूर हैं। अब जबलपुर की घटना ने प्रदेश के अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।