योजना को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने 19 सवालों के मांगें जवाब
एसडीएम अशोक डहेरिया की अध्यक्षता में शनिवार को स्थानीय कृषि उपज मण्डी समिति हरदा में भावांतर योजना की जानकारी देने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं किसान संघ के प्रतिनिधियों की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन विश्नोई, कांग्रेस विधायक आरके दोगने, जिला कृषि समिति के सभापति ललित पटेल, रविशंकर शर्मा, किसान संघ के प्रतिनिधि एवं कृषि उपज मण्डी समिति के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे। लेकिन भावांतर योजना को लेकर आयोजित इस प्रशासनिक बैठक का जिला कांग्रेस कमेटी ने बहिष्कार किया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन विश्नोई ने भावांतर योजना को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने प्रदेश की सरकार एवं जिला प्रशासन से 19 सवालों के जवाब मांगे हैं। इसे लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने लिखित में आवेदन भी सौंपा है। उन्होंने कहा है कि सरकार की यह योजना छलावा मात्र है। उन्होंने सवाल किए हैं कि जब अन्य राज्यों में सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर हो रही है, तो हमारे राज्य में क्यों नहीं। भाजपा सरकार ने किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का वादा किया था क्या किसानों की आय दोगुनी हुई। 2017 में भी भावांतर योजना आई थी, उस समय का पैसा किसानों को अभी तक क्यों नहीं मिला। 2014 से लेकर 2025 तक डीएपी एवं यूरिया, सल्फर, एनपीके, पोटास, सहित सभी उर्वरक एवं दवाई के भाव दोगुना से ज्यादा हो गए, लेकिन फसलों के दाम क्यों नहीं बढ़े। सभी कृषि उपकरणों के दाम 2013 में कितने थे और 2025 में कितने हैं। 2013 में डीजल, पेट्रोल के भाव क्या थे और 2025 में क्या हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की केन्द्र सरकार ने वर्ष 2008 में पूरे देश में किसानों का 72 हजार करोड़ रूपए का कर्जा माफ किया था। वर्ष 2018 में मप्र में कांग्रेस पार्टी ने 26 लाख 95 हजार किसानों का 11600 करोड़ रूपए का कर्जा माफ किया था।
भाजपा बताए कि उनकी सरकार ने कितनी बार किसानों का कर्जा माफ किया है। श्री विश्नोई ने बताया कि वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2025 तक किसानों को 5 बार फसल बीमा क्लेम मिला है, उसके लाखों किसान वंचित रहे, लाखों किसानों को प्रीमियम से कम बीमा मिला था। उसका निराकरण आज तक क्यों नहीं हुआ। वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों को अतिवृष्टि से फसल बबार्दी की राहत राशि तीन किश्तों में देना था, एक किश्त कमलनाथ ने मुख्यमंत्री रहते दे दी थी, शेष राशि भाजपा ने अपनी सरकार बनने के बाद क्यों नहीं दी। जबकि किसानों को राहत राशि देने का फैसला कैबिनेट में लिया गया था। श्री विश्नोई ने कहा कि एक ओर सरकार और जिला कलेक्टर कह रहे हैं कि भावांतर योजना 2018-19 से लागू है, तो इतने वर्षों में किसानों की फसलें जो मंडियों में समर्थन मूल्य से कम भाव पर बिक्री हुई है, उनके अंतर की राशि सरकार ने किसानों को क्यों नहीं दी या उसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया गया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री विश्नोई ने कहा कि भाजपा सरकार और जिला कलेक्टर पांच दिन में हमारे 19 सवालों का जवाब दें, अगर हमें सही जबाव मिला, तो हम खुद गांव-गांव जाकर किसानों को भावांतर के फायदे बताएंगे। अन्यथा किसानों को भ्रमित करने का काम सरकार एवं जिला कलेक्टर न करें, किसानों को पता है कि खेती में लागत कितनी लगती हैं और कितना नुकसान होता है कितना फायदा होता है। इसकी भी जानकारी सभी को देनी चाहिए।