500 करोड़ के मरम्मत की ‘माया’

सड़कों में भ्रष्टाचार का मामला सरगर्म है। इनके निर्माण का बजट तो प्रपोजल के हिसाब से कितना भी हो सकता है, केवल मेंटेनेंस के लिए पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ने लगभग 500 करोड़ का बजट रखा है। यह राशि हर साल गड्ढों में जाती है। मरम्मत के इस ‘माया जाल’ में सब फंसे हैं। एक अथॉरिटी को सड़कें देने के लिए मुख्यमंत्री से लेकर नीचे तक प्रयास हुए, पर नतीजा नहीं निकला।

राजधानी में सड़कों में हो रहे भ्रष्टाचार बताने के लिए यह 2 फोटो पर्याप्त हैं। ये फोटो वार्ड नं. 10 ईदगाहहिल्स क्षेत्र के हैं। पहले चित्र में आप देखरहे हैं कि जेसीबी लगाकर नाले से गिट्टी निकाली जा रही है। यह गिट्टी चित्र नं. 2 में पैचवर्क के नाम पर बिछाई गई थी। काम इतना घटिया हुआ कि बारिश में बह गई और नाले में जमा हो गई । इस सड़क में इंजी. का नाम जमील मोहम्मद और ठेकेदार का नाम साल्वन कंपनी है।

8 साल में 6 हाइलेवल बैठक

सड़कों के विकास के लिए बीते 8 साल में 6 उच्चस्तरीय बैठक होने के बाद भी अब तक इस पर आम सहमति नहीं बन पाई है कि इनके विकास को लेकर कैसे काम हो, जिससे आज भी आम जनता आवाजाही में परेशानी उठा रही है। सभी विभागों को एकजुट कर एक अथॉरिटी विकसित की जाए, जो शहर की सड़कों के डेवपलमेंट और रखरखाव का जिम्मा उठाएं। जबकि, खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अलग-अलग दो बार बैठक कर सड़कों की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी। दोनों ने सड़कों के समग्र विकास के लिए एक अथॉरिटी बनाकर इनके निर्माण की बात कह चुके हैं। इसके साथ ही संभागायुक्त ने कई बैठकें ली। शनिवार को एक बार फिर उस समय सड़कों को मुद्दा सरगर्म हुआ जब नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने निगम अफसरों के साथ राजधानी की सड़कों का निरीक्षण किया।