सोमवार को सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में इको सेंसटिव जोन की सीमाओं के संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान पिपरिया विधायक ठाकुरदास नागवंशी, सलकनपुर ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय सहित महेश शर्मा, कमल दूध, पवन झा, संदीप जैन आदि ने भी प्रतिनिधि मंडल में सहभागिता की। विधायक विजयपाल सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को बताया कि वन तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के इको सेंसटिव जोन की सीमाओं का निर्धारण कर मानचित्र तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में निम्नलिखित विषयों को दृष्टिगत रखते हुए ही सीमाओं का निर्धारण कर प्रकाशित किया जाना चाहिए। भारत सरकार द्वारा 9 अगस्त 2017 को सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की परिधी में इको सेंसटिव जोन का गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया था, किंतु प्रचार-प्रसार व मुनादी आदि न होने के कारण प्रभावित पक्षों द्वारा इस पर आपत्ति पेश नहीं की जा सकी थी। इसपर नक्शे के साथ प्रभावित पक्षों एवं ग्रामों से पुन: दावे, आपत्ति बुलाए जाने की आवश्यकता है।
09 अगस्त 2017 के उक्त गजट नोटिफिकेशन म पेज क्र. 03 कंडिका (1) में स्पष्ट रूप से क्रिटिकल टायगर हेबीटेट, (कोर जोन) की सीमाओं से नगरीय तथा आबादी क्षेत्र में इसका विस्तार केवल 100 मीटर तक (ह्यूमन हेबीटेट) व अन्य क्षेत्र में इसका विस्तार 02 कि.मी तक रखा जाना उल्लेखित है, किंतु सतपुडा राष्ट्रीय उद्यान द्वारा प्रदत्त मानचित्र में संपूर्ण बफर के क्षेत्र को जिसमें राजस्व का क्षेत्र भी संलग्न है को इको सेंसटिव जोन का हिस्सा बताया जा रहा है, जो नोटिफिकेशन में वर्णित कंडिका (1) का व शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। राष्ट्रीय उद्यान द्वारा प्रकाशित विभिन्न नक्शों में कोर तथा बफर के मानचित्र राजपत्र में प्रकाशित जो कि 03 जनवरी 2011 जो बफर क्षेत्र से संबंधित राजपत्र है और 24 दिसंबर 2007 जो कोर क्षेत्र से संबंधित राजपत्र में वर्णित सीमाओं से मिलान करने पर भिन्न प्रतीत हो रहे हैं।