बड़े तालाब में अतिक्रमण, 10 साल में तीन बार सर्वे फाइलों में सिमटी कार्रवाइ

भोपाल: राजधानी के बड़े तालाब के अतिक्रमण का मामला एनजीटी में गहरा गया है। हैरानी की बात तो यह है कि उसकी सख्ती के बाद भी इसको नहीं हटाया जा सका है। हाल ही में अपर लेक के अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने निगम को फटकार भी लगायी थी लेकिन उसके बाद भी इसको क्लियर नहीं किया जा सका है। हैरानी की बात तो यह है कि अपर लेक के कैचमेंट एरिया में होने वाले निर्माण के सर्वे को ही  सवालिया निशान उठने लगे हैं क्योंकि अभी तक लेक के सीमाकंन का कार्य ही पूरा नहीं किया जा सका है।

दस साल में तीन बार सर्वे

सच तो यह है कि बड़ा तालाब अतिक्रमण की जकड़ में है। सरकार की रिपोर्ट में ये सामने आ चुके हैं, पर कार्रवाई जमीन पर न होकर फाइलों में ही सिमट गई। 10 साल में भदभदा की साढ़े 3 सौ से ज्यादा झुग्गियां जरूर हटी हैं। बाकी अतिक्रमण अब भी तालाब की जद को पार कर चुके हैं। अब एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइबल) ने फिर फटकार लगाई है। बड़ा तालाब का बीते दस साल में 3 बार सर्वे हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आए, लेकिन सर्वे रिपोर्ट फायनल नहीं हो पायी है। इससे पहले बड़े तालाब का सीमांकन करने के लिये निगम ने योजना बनायी थी जिसके चलते तालाब के पानी के एफटीएल तक पहुंचते ही इसकी सीमा का सीमाकंन किया जाना था।