ED का बड़ा झटका: जेपी इंफ्राटेक एमडी मनोज गौड़ गिरफ्तार, 12,000 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनोज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है, जिसमें घर खरीददारों के साथ 12,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और फंड डायवर्शन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गौड़ को गुरुवार रात दिल्ली में हिरासत में लिया गया, और शुक्रवार को उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि: घर खरीददारों का पैसा, अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्शन

जेपी इंफ्राटेक पर लंबे समय से घर खरीददारों के साथ धोखाधड़ी के आरोप लगते रहे हैं। कंपनी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलाके में विस्थापित (यमुना एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट) के तहत हजारों फ्लैट बुकिंग के लिए अग्रिम राशि ली, लेकिन कब्जा देने में वर्षों की देरी की। ईडी की जांच में सामने आया है कि घर खरीददारों से वसूली गई राशि को अन्य प्रोजेक्ट्स, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल डेवलपमेंट में डायवर्ट कर दिया गया। इससे करीब 20,000 से अधिक घर खरीददार प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कई ने सालों से EMI चुकाई लेकिन घर नहीं मिला।

ईडी ने मई 2025 में इस मामले में पहली बार छापेमारी की थी, जिसमें दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के 15 से अधिक ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। उस दौरान जेपी इंफ्राटेक, जेपी एसोसिएट्स, गौरसॉन्स, गुलशन होम्स, महागुन ग्रुप और सुरक्षित रियल्टी जैसे बिल्डरों के कार्यालयों और संपत्तियों की तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने फंड सिफनिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत इकट्ठा किए, जो अब मनोज गौड़ की गिरफ्तारी का आधार बने।

गिरफ्तारी का विवरण: क्या मिला ईडी को?

सूत्रों के मुताबिक, मनोज गौड़ को दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। ईडी ने आरोप लगाया है कि जेपी ग्रुप ने जानबूझकर घर खरीददारों की रकम का दुरुपयोग किया, जिससे कंपनी दिवालिया हो गई। जेपी इंफ्राटेक को 2021 में इंसॉल्वेंसी कोड के तहत मुंबई की सुरक्षित रियल्टी ग्रुप ने खरीद लिया था, लेकिन पुराने घोटाले की जांच जारी रही। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने गौड़ के बैंक खातों, संपत्तियों और बिजनेस पार्टनर्स के लेन-देन की गहन जांच शुरू कर दी है।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह मामला केवल धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग का भी है। फंड्स को लेयर के जरिए छिपाया गया, जो पीएमएलए के दायरे में आता है।” जांच में जुड़े अन्य नामों में जेपी ग्रुप के अन्य डायरेक्टर्स और एसोसिएटेड फर्म्स शामिल हैं।

प्रभावित पक्षों की प्रतिक्रिया: घर खरीददारों में उम्मीद की किरण

इस गिरफ्तारी से हजारों घर खरीददारों में राहत की सांस बही है। नोएडा के एक प्रभावित खरीददार, राजेश कुमार ने कहा, “हम सालों से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। ईडी का यह कदम सकारात्मक है, लेकिन हमें अपने पैसे और घर वापस चाहिए।” जेपी होमबायर्स वेलफेयर सोसाइटी के एक सदस्य ने बताया कि संगठन सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर चुका है।

दूसरी ओर, जेपी इंफ्राटेक ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “हम जांच में सहयोग कर रहे हैं और सभी आरोपों का खंडन करते हैं।”

रियल एस्टेट सेक्टर पर असर: विश्वास बहाली की चुनौती

यह घटना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए झटका है, जहां पहले से ही रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट) के बावजूद धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईडी की सख्ती से बिल्डर्स पर पारदर्शिता का दबाव बढ़ेगा। इंडस्ट्री एनालिस्ट अनिल जैन ने कहा, “जेपी केस एक उदाहरण है कि फंड डायवर्शन कैसे हजारों परिवारों को बर्बाद कर सकता है। सरकार को अब और सख्त कानून बनाने चाहिए।”

ईडी की यह कार्रवाई पिछले कुछ महीनों में रियल एस्टेट घोटालों के खिलाफ लगातार हो रही छापेमारियों का हिस्सा है। मई में ही 12,000 करोड़ के इस स्कैम में प्रारंभिक सर्चेस हुई थीं, जो अब गिरफ्तारी तक पहुंच गई हैं। जांच जारी है, और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।