देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के दौरान बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) की मौतें और आत्महत्याएँ चिंता का गंभीर कारण बन गई हैं। मृतकों के परिजनों ने स्पष्ट रूप से अत्यधिक काम के दबाव, देर रात तक ऑनलाइन मीटिंग और निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के तनाव को ही इन मौतों का कारण बताया है।
मध्य प्रदेश में एक रात में दो मौतें, दो को हार्ट अटैक
मध्य प्रदेश में 21 और 22 नवंबर की रात दो बीएलओ की ‘बीमारी’ के कारण मौत हो गई। रायसेन में बीएलओ रमाकांत पांडे की ऑनलाइन मीटिंग के बाद बेहोश होकर गिरने से मौत हो गई। उनके परिजनों ने बताया कि वह चार रातों से सोए नहीं थे और काम के अत्यधिक तनाव में थे। इसी तरह, दमोह के सीताराम गोंड (50) की भी फॉर्म भरते समय तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई।
इसके अलावा, भोपाल में शनिवार को ड्यूटी के दौरान बीएलओ कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक को हार्ट अटैक आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। रायसेन के बीएलओ नारायण सोनी छह दिन से लापता हैं, जिनके परिजनों ने बताया कि वह टारगेट और निलंबन की चेतावनी से परेशान थे। इससे पहले 6 नवंबर को दमोह में सड़क हादसे में श्याम शर्मा और 11 नवंबर को दतिया में उदयभान सिहारे ने खुदकुशी की थी।
बंगाल, राजस्थान और गुजरात में भी संकट
मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी हालात गंभीर हैं: पश्चिम बंगाल के नदिया में बीएलओ रिंकू का शव घर की छत से लटका मिला और एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। यह राज्य में एसआईआर से जुड़ी दूसरी आत्महत्या और तीसरी मौत है। राजस्थान के जयपुर में रविवार को बीएलओ मुकेश जांगिड़ (48) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। करौली में भी एक बीएलओ की मौत हुई और सवाई माधोपुर में एक बीएलओ को हार्ट अटैक आया। गुजरात में भी पिछले 4 दिनों में 4 बीएलओ की मौत की खबर है, जबकि अहमदाबाद और दाहोद में बीएलओ को बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
निर्वाचन आयोग की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 98.98% फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। फॉर्मों के डिजिटलीकरण में राजस्थान $60.54\%$ के साथ सबसे आगे है, जबकि केरल में सबसे कम $10.58\%$ फॉर्म ही डिजिटल हो पाए हैं।