चंडीगढ़ के कानूनी दर्जे (Status) को बदलने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने फिलहाल विराम लगा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही आगामी शीतकालीन सत्र में इससे संबंधित कोई बिल लाने की योजना है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर) में एक ऐसा बिल ला सकती है, जिसके तहत चंडीगढ़ को संविधान के आर्टिकल 239 की जगह 240 में शामिल किया जाए। ऐसा होने पर चंडीगढ़ पूरी तरह से केंद्र शासित प्रदेश बन जाता, और इसके प्रशासनिक अधिकार राष्ट्रपति तथा केंद्र के पास चले जाते। पंजाब के राजनीतिक दल इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे चंडीगढ़ पर पंजाब का पारंपरिक नियंत्रण खत्म हो जाएगा।
गृह मंत्रालय ने जारी बयान में कहा:
“संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।”
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को परिवर्तित करने की कोई बात नहीं है। गृह मंत्रालय ने कहा कि शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई बिल प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है, इसलिए चिंता की आवश्यकता नहीं है।
शिरोमणि अकाली दल आंदोलन की तैयारी में
हालांकि, केंद्र सरकार के इनकार के बावजूद, पंजाब की प्रमुख पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने चंडीगढ़ स्टेटस के विवाद को लेकर अपनी कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि 24 नवंबर 2025 को पार्टी मुख्यालय में यह बैठक बुलाई गई है। इसमें पार्टी अगले संघर्ष की रूपरेखा तैयार करने के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों से भी विचार-विमर्श कर रही है। शिअद ने स्पष्ट किया है कि वे इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।