हिंदी सिनेमा के ‘मैं जट यमला पगला दीवाना’ के नाम से मशहूर दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का आज (सोमवार, 24 नवंबर) दोपहर करीब 1 बजे मुंबई में निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने जुहू स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह हाल ही में ब्रीच कैंडी अस्पताल से इलाज के बाद डिस्चार्ज होकर लौटे थे।
धर्मेंद्र के निधन की खबर से पूरे देश और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके छह दशक लंबे करियर को श्रद्धांजलि देते हुए सिनेमा जगत ने इसे एक स्वर्णिम युग का अंत बताया है।
दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से भले ही बॉलीवुड में एक शून्य पैदा हो गया हो, लेकिन उनका 60 साल का बेमिसाल करियर ऐसे कई ‘यादगार पलों’ से भरा है, जिन्होंने उन्हें न केवल ‘ही-मैन’ का खिताब दिलाया, बल्कि उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों का चहेता भी बनाए रखा। उनका ‘जट यमला पगला दीवाना’ अंदाज ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
आइए, उनके जीवन और पर्दे के कुछ ऐसे ही अनमोल पलों को याद करें:
1. दिलकश रोमांस और ‘फूल और पत्थर’ का उदय
धर्मेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत एक ऐसे रोमांटिक हीरो के रूप में की, जिसकी सादगी में भी एक मजबूत आकर्षण था। 1966 में आई फिल्म ‘फूल और पत्थर’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी। इस फिल्म ने उन्हें एक नए ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में स्थापित किया। उनका मस्कुलर लुक और मासूमियत का मिश्रण उस दौर के दर्शकों के लिए नया था। इसी दौर में ‘बंदिनी’ और ‘सत्यकाम’ जैसी फिल्मों में उनकी गंभीर अभिनय क्षमता ने आलोचकों का दिल जीता।
2. ‘शोले’ का वीरू: एक्शन और कॉमेडी का संगम
1975 में आई ‘शोले’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सिनेमाई इतिहास है, जिसमें धर्मेंद्र का किरदार ‘वीरू’ अमर हो गया। जय (अमिताभ बच्चन) के साथ उनकी दोस्ती, बसंती (हेमा मालिनी) के साथ उनका रोमांटिक अंदाज़, और सबसे यादगार— पानी की टंकी पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी वाला कॉमेडी सीन— आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार पलों में गिना जाता है। यह किरदार ही उनके ‘ही-मैन’ वाली छवि का प्रतीक बन गया।
3. कॉमेडी के बादशाह: ‘चुपके चुपके’ का प्रोफेसर परिमल
धर्मेंद्र की सबसे खास बात थी उनकी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग। ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक कॉमेडी ‘चुपके चुपके’ (1975) में प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी के रूप में उनका प्रदर्शन आज भी मील का पत्थर माना जाता है। शुद्ध हिंदी बोलने वाले ड्राइवर से लेकर प्रोफेसर तक के उनके किरदार में सहजता और हास्य का ऐसा मिश्रण था, जिसने उन्हें सिर्फ एक्शन हीरो के ठप्पे से बाहर निकाला।
4. हेमा मालिनी के साथ असल जिंदगी का रोमांस
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की प्रेम कहानी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित कहानियों में से एक है। पर्दे पर ‘सीता और गीता’ से लेकर ‘ड्रीम गर्ल’ तक उनकी जोड़ी ने जो जादू बिखेरा, वह असल जीवन में उनके विवाह के साथ परवान चढ़ा। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री हमेशा एक यादगार पल रही, जो उनके निजी रिश्ते की गहराई को दर्शाती है।
5. आखिरी सलाम: ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ का कमबैक
करीब छह दशकों तक फिल्मों में रहने के बाद, 2023 में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में उनका कमबैक किसी यादगार पल से कम नहीं था। शबाना आज़मी के साथ उनके रोमांस और क्लाइमेक्स में उनके लिप लॉक सीन ने दर्शकों को हैरान कर दिया। 87 साल की उम्र में उन्होंने साबित किया कि अभिनय और प्रेम की भावना हमेशा जवाँ रहती है। यह उनका आखिरी और सबसे भावुक ऑन-स्क्रीन पल था, जिसने दर्शकों को एक अंतिम खूबसूरत तोहफा दिया।
धर्मेंद्र जी ने अपने जीवनकाल में हर भावना को पर्दे पर जीया। उनकी यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।