प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर पर विजय ध्वज फहराया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी उनके साथ मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने वहां उपस्थित लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित किया और भगवान राम के आदर्शों को भारत के कल्याणकारी विकास से जोड़ा।
उन्होंने रामचरितमानस की प्रसिद्ध पंक्ति “नहीं दरिद्र कोउ दुखी न दीना” का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का संकल्प यही है कि देश में कोई गरीब या दुखी न रहे। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभु राम भेदभाव से नहीं, बल्कि भाव से जुड़ते हैं। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय हैं और शक्ति से अधिक संयोग को महत्व देते हैं।
पिछले 11 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि सरकार ने महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, आदिवासियों, वंचितों, युवाओं और किसानों सहित समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया है। जब देश का हर व्यक्ति और हर क्षेत्र सशक्त बनेगा, तभी सच्चा रामराज्य स्थापित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें आने वाली हजार साल की पीढ़ियों के लिए मजबूत भारत की नींव रखनी है। जो केवल वर्तमान सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं।
प्रभु राम के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राम मर्यादा, धर्म, जनहित, ज्ञान, विवेक और कोमलता में दृढ़ता के प्रतीक हैं। यह धर्मध्वज दूर से ही रामलला के जन्मस्थान के दर्शन कराएगा और युगों-युगों तक श्रीराम के आदर्शों को मानवता तक पहुंचाता रहेगा।
उन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी भक्तों, श्रमिकों, इंजीनियरों, वास्तुकारों और योजनाकारों को हृदय से धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने कहा कि आज सदियों की वेदना का अंत हो रहा है। भगवान राम युवराज बनकर अयोध्या से निकले थे और मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटे। उनके साथ गुरु वशिष्ठ की शिक्षा थी, माता शबरी का ममता था और निषादराज का साथ था – यह हमें सिखाता है कि साध्य से अधिक साधन का महत्व नहीं, बल्कि समरसता और सभी के विकास का भाव महत्वपूर्ण है।
लॉर्ड मैकाले की गुलामी वाली मानसिकता पर प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2035 में मैकाले की उस व्यवस्था के 200 वर्ष पूरे होंगे। हमें संकल्प लेना है कि भारत को गुलामी की हीनभावना से पूरी तरह मुक्त कर देंगे। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी कई क्षेत्रों में विदेशी चीजें श्रेष्ठ और भारतीय चीजें दोयम दर्जे की समझने का विकार बना हुआ है। कुछ लोग तो राम को ही नकारते रहे – यह भी गुलामी की मानसिकता का ही प्रमाण है।
अंत में श्री मोदी ने कहा कि त्रेता युग में अयोध्या ने दुनिया को नीति और मर्यादा का पाठ पढ़ाया था, अब 21वीं सदी की अयोध्या दुनिया को समावेशी और समृद्ध विकास का मॉडल देगी। इस पावन अवसर पर उन्होंने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।