अफगानिस्तान के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हाजी नूरुद्दीन अज़ीज़ी की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच रिश्तों में नया जीवन फूंक दिया है। तालिबान के 2021 में सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है जब भारत-अफगानिस्तान संबंधों में इतनी ठोस और व्यावहारिक प्रगति देखने को मिली है। इस घटनाक्रम से पाकिस्तान के हुक्मरानों में बेचैनी साफ झलक रही है।
मंत्री अज़ीज़ी ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच वीज़ा से जुड़ी सारी अड़चनें दूर हो गई हैं। अब अफगान व्यापारी, छात्र और आम नागरिक काबुल स्थित भारतीय दूतावास से आसानी से व्यापारिक, चिकित्सा और अन्य श्रेणी के वीज़ा हासिल कर सकेंगे। खास तौर पर मेडिकल वीज़ा की वापसी बहुत अहम है, क्योंकि हजारों अफगान हर साल गंभीर बीमारियों का इलाज कराने भारत आते रहे हैं और भारत को वे सबसे भरोसेमंद विकल्प मानते हैं।
यात्रा के दौरान व्यापार, परिवहन कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाएं, एफएसएसएआई शुल्क में राहत, संयुक्त व्यापार समिति और कार्यकारी समूहों को फिर से सक्रिय करने जैसे कई लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। कपड़ा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। अफगानिस्तान भारत की कपास और गारमेंट इंडस्ट्री की विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहता है। वर्तमान में भारत अफगानिस्तान को कपड़ा और परिधान निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।
अज़ीज़ी ने भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार को जल्द से जल्द एक अरब डॉलर के पार ले जाने का इरादा दोहराया। अफगानिस्तान ने खनन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएं और निवेश के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को नए अवसर देने की इच्छा जताई। साथ ही काबुल ने यह संदेश भी दिया कि पाकिस्तान पर अत्यधिक निर्भरता अब उसके हित में नहीं है। टायरियन बॉर्डर पर लगातार तनाव और हजारों मालवाहक ट्रकों के दिनों-दिन फंसे रहने की स्थिति ने इस सोच को और मजबूत किया है।
मंत्री के इस बयान ने क्षेत्रीय कूटनीति में हड़कंप मचा दिया कि “भारत बेहतर गुणवत्ता और बेहतर शर्तों वाला भागीदार है।” इसके साथ ही पाकिस्तान की पारगमन शक्ति को दरकिनार करते हुए भारत-अफगान एयर फ्रेट कॉरिडोर, ईरान के चाबहार बंदरगाह वाले मार्ग और मध्य एशिया तक पहुंचने वाले वैकल्पिक जमीनी रास्तों को फिर से सक्रिय करने की दिशा में तेज़ी आई है। अफगानिस्तान द्वारा पाकिस्तानी दवाओं के आयात पर तीन महीने का अस्थायी प्रतिबंध भी इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
संक्षेप में कहें तो हाजी नूरुद्दीन अज़ीज़ी का दिल्ली दौरा महज़ व्यापारिक यात्रा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक, मानवीय और सामरिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। कुछ महीने पहले अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा ने संवाद का दरवाजा खोला था, जिसे अब व्यापारिक स्तर पर मजबूती प्रदान की गई है। महज़ दो सप्ताह के अंदर दो उच्चस्तरीय दौरे इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अफगानिस्तान अब पाकिस्तानी दबाव से बाहर निकलकर भारत के साथ लंबी और भरोसेमंद साझेदारी चाहता है।