प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की बैठक में बुधवार को नए मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी), कई सूचना आयुक्तों और एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति पर विचार-विमर्श हुआ। इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल थे।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया और प्रस्तावित उम्मीदवारों की सूची पर कड़ी असहमति जताई। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने शॉर्टलिस्ट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने की बात उठाई। राहुल ने पहले ही सरकार से आवेदकों की जातिगत संरचना की जानकारी मांगी थी, जो बैठक के दिन उपलब्ध कराई गई। इस जानकारी से पता चला कि पिछड़े वर्गों से आने वाले आवेदकों का प्रतिशत बहुत कम था और शॉर्टलिस्ट में भी ऐसे उम्मीदवारों की संख्या नगण्य थी। उन्होंने इस असंतुलन को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया और एक लिखित असहमति पत्र सौंपा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। साथ ही, कुछ प्रस्तावित उम्मीदवारों के पारदर्शिता संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि संवैधानिक एवं स्वतंत्र संस्थाओं में नियुक्तियों के दौरान वंचित वर्गों को लगातार हाशिए पर रखा जा रहा है। उनकी आपत्तियों के बाद उपलब्ध आवेदकों में से कुछ योग्य उम्मीदवारों पर विचार करने को लेकर आंशिक सहमति बनी।
बैठक से ठीक एक दिन पहले राहुल गांधी ने लोकसभा में ऐसी चयन समितियों में विपक्ष की भूमिका को महज औपचारिक बताया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी में उनकी बात का कोई असर नहीं होता और तय वही होता है जो सरकार चाहती है।
मुख्य सूचना आयुक्त का पद 13 सितंबर से रिक्त है, जब पूर्व सीआईसी हीरालाल समारिया सेवानिवृत्त हुए। केंद्रीय सूचना आयोग में कुल 10 सूचना आयुक्तों के पद होते हैं, लेकिन फिलहाल केवल दो ही कार्यरत हैं और आठ पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।