दिल्ली और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति अब वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन गई है। सोमवार को यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और सिंगापुर ने अपने नागरिकों को उत्तर भारत, विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह देते हुए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। इन देशों ने खराब हवा को स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया और अतिरिक्त सतर्कता अपनाने की अपील की।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गया है। कुछ स्थानों जैसे आनंद विहार और जहांगीरपुरी में एक्यूआई 490 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे लोगों को सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और गले में दर्द जैसी शिकायतें हो रही हैं।
सिंगापुर हाई कमीशन ने अपने बयान में दिल्ली एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) के स्टेज-4 लागू होने का हवाला देते हुए नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने यात्रा से पहले हवा की स्थिति जांचने और जरूरत पड़ने पर प्लान स्थगित करने की सिफारिश की। साथ ही, बाहर निकलते समय मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई।
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने चेतावनी दी कि उत्तर भारत में अक्टूबर से फरवरी तक प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। एडवाइजरी में गर्भवती महिलाओं, बच्चों, वृद्धों तथा हृदय या श्वास रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को यात्रा से पूर्व चिकित्सक से सलाह लेने की हिदायत दी गई।
कनाडा ने भी समान एडवाइजरी जारी कर कहा कि सर्दियों में दिल्ली जैसे शहरों में स्मॉग सबसे खराब होता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण और बढ़ता है। श्वास संबंधी समस्याओं वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया।
दिल्ली में प्रदूषण की नवीनतम स्थिति
शहर में घना स्मॉग छाया होने से दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट पर सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं, कई रद्द हुईं या डायवर्ट की गईं। खराब हवा के कारण दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में निचली कक्षाओं के स्कूलों को ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेप-4 लागू कर दिया गया है, जिसमें निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध, कार्यालयों में 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ काम और कुछ वाहनों की आवाजाही पर रोक शामिल है।