‘वीबी-जी राम जी बिल’ पर संसदीय समिति में सियासी तूफान

‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) बिल 2025’ को लेकर संसद में सियासी तनाव तेज हो गया है। यह बिल मनरेगा की जगह लेने जा रहा है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने 29 दिसंबर को समिति की बैठक बुलाई है। बैठक के एजेंडे में इस नए बिल पर चर्चा और इसकी मनरेगा से तुलना शामिल है। विपक्षी दल इसे नए कानून के खिलाफ राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है।

बीजेपी सांसदों का कहना है कि बिल संसद से पारित हो चुका है, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी और गजट अधिसूचना के बाद ही यह कानून बनेगा। ऐसे में अभी इसे कानून मानकर चर्चा करना उचित नहीं है। समिति के सदस्य विवेक ठाकुर ने इसे ‘विचारहीन’ करार दिया। एनडीए के अन्य सांसदों का तर्क है कि हाल ही में पारित विधेयक पर समिति केवल क्रियान्वयन की समीक्षा कर सकती है, न कि उसकी तुलना या आलोचना। उनका आरोप है कि कांग्रेस और विपक्षी दल जानबूझकर इस बिल का राजनीतिकरण कर रहे हैं, खासकर इस तथ्य को लेकर कि नए कानून में महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया है।

यह पहली बार नहीं है जब इस समिति का एजेंडा विवादों में घिरा हो। इससे पहले जुलाई में भूमि अधिग्रहण कानून की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अभिनेता प्रकाश राज को बुलाने पर बीजेपी सांसदों ने तीखा विरोध जताया था। मेधा पाटकर को ‘विकास-विरोधी’ बताते हुए उन्होंने बैठक से वॉकआउट कर दिया था, जिसके कारण वह बैठक अधर में लटक गई थी।