चांदीपुर में ‘आकाश-NG’ का सफल ट्रायल; 20 किमी की ऊंचाई तक अभेद्य हुआ भारत का आसमान

भारतीय सेना ने मंगलवार को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ी छलांग लगाई है। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम के एडवांस्ड वर्जन ‘आकाश नेक्स्ट जेनरेशन’ (Akash-NG) का सफल परीक्षण किया गया। DRDO द्वारा विकसित इस मिसाइल प्रणाली ने परीक्षण के दौरान अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को अचूक सटीकता के साथ निशाना बनाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।

एक साथ 10 लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता ‘आकाश-NG’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसकी बहुआयामी मारक क्षमता है। यह सिस्टम एक साथ 10 अलग-अलग हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर उन्हें तबाह करने में सक्षम है। यह फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, अत्याधुनिक ड्रोन और मानवरहित विमानों (UAV) को 80 किलोमीटर की दूरी तक और आसमान में 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर सकता है।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस है ‘आकाश-NG’ DRDO के मुताबिक, इस नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम को भारतीय वायु सेना और थल सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका निर्माण ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ (BDL) ने किया है। परीक्षण के दौरान इसने न केवल लंबी दूरी के लक्ष्यों को भेदा, बल्कि सीमा के करीब कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को भी सफलतापूर्वक नष्ट किया। इसमें लगा अत्याधुनिक रडार और कमांड सिस्टम इसे दुनिया के बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम्स की श्रेणी में खड़ा करता है।

सेना की बढ़ेगी ताकत अधिकारियों ने बताया कि ‘आकाश-NG’ को जल्द ही सेना और वायु सेना के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके तैनात होने के बाद भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल प्रणाली विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में दुश्मन के हवाई दुस्साहस का जवाब देने में गेम-चेंजर साबित होगी।

इस सफल ट्रायल पर रक्षा मंत्री और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे ‘सशक्त भारत’ की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।