भोपाल राजधानी के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पीछे बसी झुग्गियों को हटाने की प्रशासन की मुहिम फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। सोमवार सुबह होने वाली इस बड़ी कार्रवाई को कांग्रेस के कड़े विरोध और पर्याप्त पुलिस बल की अनुपलब्धता के चलते स्थगित करना पड़ा। प्रशासन इन 27 परिवारों को शहर के बाहरी इलाके ‘मालीखेड़ी’ में विस्थापित करने की योजना बना रहा है।
क्यों रुकी कार्रवाई?
जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें सोमवार सुबह पूरी तैयारी के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंचने वाली थीं। हालांकि, ऐन वक्त पर एसडीएम (SDM) ने बयान जारी कर बताया कि “पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण आज की कार्रवाई को स्थगित किया गया है।” लेकिन इस प्रशासनिक कारण के पीछे रविवार को हुआ भारी राजनीतिक ड्रामा मुख्य वजह माना जा रहा है। रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अचानक झुग्गी बस्ती पहुंचे थे। उन्होंने मौके से ही प्रशासनिक अधिकारियों को फोन लगाकर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई और कड़ाके की ठंड में परिवारों को बेदखल करने की कार्रवाई को अमानवीय करार दिया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस जमीन को खाली कराना अनिवार्य है क्योंकि यह प्राइम लोकेशन पर स्थित सरकारी भूमि है। अधिकारियों को अंदेशा है कि अगली बार भी भारी हंगामा हो सकता है, इसलिए अगली कार्रवाई की तारीख और समय को पूरी तरह गुप्त रखा जा रहा है। संभावित विरोध से निपटने के लिए अब भारी पुलिस बल के साथ ‘सरप्राइज एक्शन’ की तैयारी है। चिन्हित किए गए 27 परिवारों को मालीखेड़ी में शिफ्ट करने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं।
परिवारों का भविष्य और चुनौतियां
हालांकि प्रशासन इन्हें मालीखेड़ी में बसाने का दावा कर रहा है, लेकिन झुग्गीवासियों के मन में कई सवाल और डर हैं:
- रोजगार का संकट: वर्तमान में पॉलिटेक्निक चौराहे के पास रहने से इन परिवारों को आसपास के क्षेत्रों में आसानी से काम मिल जाता है। मालीखेड़ी शिफ्ट होने पर उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
- शिक्षा: बीच सत्र में बच्चों को शिफ्ट करने से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ने की संभावना है।
- बुनियादी सुविधाएं: क्या मालीखेड़ी में पक्के मकान, बिजली और पानी की तत्काल व्यवस्था होगी? यह अब भी एक बड़ा सवाल है।