यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच छिड़ा ‘प्रॉक्सि वॉर’; 20 लड़ाकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संकट की आहट

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के समीकरण रातों-रात बदल गए हैं। दशक भर तक यमन के गृहयुद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले दो सबसे करीबी सहयोगी, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अब एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को सऊदी अरब की वायुसेना ने यमन के हदरामौत प्रांत में यूएई समर्थित ‘साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (STC) के ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इस हमले में यूएई समर्थित 20 से अधिक लड़ाकों की मौत हो गई है, जिसने खाड़ी देशों के बीच एक खुली जंग का बिगुल फूंक दिया है।

 दोस्ती से दुश्मनी तक: आखिर क्यों टूटी ‘ढाल’?

2015 में जब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने तख्तापलट की कोशिश की, तब सऊदी और यूएई ने मिलकर एक गठबंधन बनाया था। लेकिन वक्त के साथ दोनों देशों के हितों में टकराव शुरू हो गया सऊदी अरब पूरे यमन को एक सूत्र में बंधा देखना चाहता है, जबकि यूएई ‘दक्षिणी यमन’ को एक अलग देश बनाने के पक्ष में है। इसी उद्देश्य के लिए यूएई STC के लड़ाकों को हथियार और ट्रेनिंग दे रहा है। सऊदी अरब खुद को अरब जगत का एकमात्र लीडर मानता है, जबकि यूएई की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक महत्वाकांक्षाएं सऊदी को खटकने लगी हैं।

ताजा विवाद तब भड़का जब पिछले महीने STC के लड़ाकों ने तेल समृद्ध हदरामौत और महरा प्रांतों पर कब्जा कर लिया। यह इलाका सऊदी अरब की सीमा से लगा हुआ है और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सऊदी ने यूएई को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह अपने समर्थित लड़ाकों को पीछे हटाए। अल्टीमेटम खत्म होते ही सऊदी के फाइटर जेट्स ने STC के कैंपों और मिलिट्री बेस पर बमबारी शुरू कर दी।

STC का पलटवार

हवाई हमलों के बाद STC के सैन्य प्रवक्ता ने इसे ‘युद्ध की घोषणा’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि वे अब सऊदी समर्थित ताकतों के खिलाफ एक “निर्णायक और अस्तित्व की लड़ाई” लड़ेंगे। STC ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सऊदी अरब अब अल-कायदा और हूतियों के साथ मिलकर उन पर हमला कर रहा है। वहीं, सऊदी अरब ने 30 दिसंबर को मुकल्ला पोर्ट पर यूएई के उन जहाजों को भी निशाना बनाया था जो कथित तौर पर भारी मात्रा में हथियार लेकर आए थे।

तेल की कीमतों पर मंडराता खतरा

सऊदी और यूएई के बीच यह टकराव केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  1. हूतियों को फायदा: दोनों सहयोगियों की आपसी लड़ाई का सीधा फायदा ईरान समर्थित हूतियों को मिलेगा, जो लाल सागर (Red Sea) में अपना दबदबा और बढ़ा सकते हैं।
  2. क्रूड ऑयल: दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक हैं। इनके बीच अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
  3. मानवीय संकट: यमन पहले से ही दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट से जूझ रहा है। नई जंग लाखों लोगों को भुखमरी के और करीब ले जाएगी।

हालाँकि यूएई ने अपने सैनिकों को पूरी तरह हटाने का ऐलान किया है, लेकिन साथ ही सऊदी पर ‘धोखे’ का आरोप भी लगाया है। खाड़ी के ये दो स्तंभ अब एक-दूसरे को शक की निगाह से देख रहे हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें धूमिल होती नजर आ रही हैं।