पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक संघर्ष अपने चरम पर पहुँच गया है। चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता की सड़कों पर उतरकर जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने दक्षिण कोलकाता के जादवपुर 8B बस स्टैंड से हाजरा क्रॉसिंग तक लगभग 5 किलोमीटर लंबे विरोध मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें वरिष्ठ मंत्रियों और सांसदों के साथ हजारों टीएमसी कार्यकर्ता “एजेंसी राज के खिलाफ” नारे लगाते हुए शामिल हुए। रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों से पहले टीएमसी की चुनावी रणनीति, उम्मीदवार सूची और संवेदनशील डेटा चोरी करने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने गृह मंत्री को ‘नॉटी’ बताते हुए कहा कि वे एजेंसियों के दम पर लोकतंत्र को कुचलना चाहते हैं।
कोलकाता में रैली के साथ-साथ दिल्ली में भी हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहाँ डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा सहित टीएमसी के कई सांसदों ने गृह मंत्री के कार्यालय के बाहर धरना दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस बीच यह कानूनी लड़ाई अब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँच गई है, जहाँ ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जांच में बाधा डालने और मौके से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जबरन ले जाने के आरोप में सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं, I-PAC ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ‘चोरी’ की पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। कोर्ट रूम में भारी हंगामे के कारण जस्टिस शुभ्रा घोष ने सुनवाई को 14 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जबकि टीएमसी इसे पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध और बंगाल की अस्मिता पर हमला करार दे रही है।