बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा पहली बार मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे पार्टी का अपना मेयर बनाने के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी एकनाथ शिंदे गुट के साथ मेयर पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
चुनावी आंकड़ों के अनुसार, कुल 227 वार्डों वाली BMC में भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें हासिल की हैं। गठबंधन की कुल ताकत 118 सीटें हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर जगह बनाई है।
मेयर पद पर दबाव बढ़ने के साथ ही शिंदे गुट ने अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में शिफ्ट कर दिया है। होटल के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम हॉर्स-ट्रेडिंग या दल-बदल को रोकने के लिए उठाया गया है। पार्षदों को कम से कम बुधवार दोपहर 3 बजे तक होटल में रहने का निर्देश दिया गया है।
शिंदे गुट का तर्क है कि 2026 में शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी मनाई जा रही है, इसलिए कम से कम ढाई साल तक शिवसेना का ही मेयर होना चाहिए। यह मांग भाजपा के साथ तनाव का कारण बन गई है, क्योंकि भाजपा मुंबई में अपना पहला मेयर बनाने के लिए उत्सुक है।
इधर, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे खुद भाजपा के मेयर बनने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “शिंदे ने अपने पार्षदों को होटल में बंदी बनाकर रखा है, क्योंकि वे भाजपा के मेयर से डरते हैं।” राउत ने इसे 2022 की बगावत की याद दिलाने वाला कदम भी बताया, जब शिंदे ने 39 विधायकों के साथ विद्रोह कर शिवसेना को विभाजित किया था।
उद्धव ठाकरे गुट ने स्थिति को और रोचक बनाते हुए कहा कि यदि “भगवान” ने चाहा तो उनकी पार्टी का भी मेयर बन सकता है। यह बयान अटकलों को और हवा दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिंदे गुट की 29 सीटें भाजपा के लिए निर्णायक हैं, लेकिन मेयर पद पर सौदेबाजी से गठबंधन में दरार आ सकती है। यह घटनाक्रम 2022 की राजनीतिक बगावत और रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की यादें भी ताजा कर रहा है, जब शिंदे गुट के विधायकों को सूरत और गुवाहाटी में होटलों में रखा गया था।
अभी मेयर चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होना बाकी है, लेकिन गठबंधन के बीच बातचीत तेज हो गई है। मुंबई की सियासत में अगले कुछ दिनों में बड़ा फैसला होने की उम्मीद है।