ग्रीनलैंड में ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में शनिवार को हजारों स्थानीय निवासियों ने सड़कों पर उतरकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्कटिक द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने की धमकियों के खिलाफ जोरदार विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है” के नारे लगाए और राष्ट्रीय झंडे लहराते हुए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च किया।

यह प्रदर्शन बर्फीली सड़कों और ठंडे मौसम के बावजूद आयोजित किया गया, जिसमें ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन भी शामिल हुए। पुलिस और आयोजकों के अनुसार, यह नुउक की आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा था, जो द्वीप के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी विरोधी पोस्टर और तख्तियां लेकर सड़कों पर निकले, जो अमेरिकी दखल के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखा रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान ही ट्रंप प्रशासन ने आठ यूरोपीय देशों – डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड – पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह टैरिफ फरवरी से लागू होगा और जून तक बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा, जब तक ग्रीनलैंड की “पूरी और पूर्ण” खरीद के लिए समझौता नहीं हो जाता। इन देशों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध किया है।

इस घोषणा से ग्रीनलैंडवासियों में गुस्सा और भड़क गया। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी धमकियों के कारण अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को मंजूरी देना इस समय संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संसद में इस समझौते की मंजूरी प्रक्रिया को फिलहाल रोका जा सकता है।